फर्रुखाबाद/
जिला अस्पताल लोहिया की महिला विंग स्थित स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में क्षमता से लगभग दोगुने नवजात भर्ती होने का मामला सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए। बीमार तीन दिन की बच्ची को भर्ती कराने पहुंचे पिता को जब बेड खाली न होने की जानकारी मिली तो उन्होंने डायल-112 पर पुलिस बुला ली। मौके पर पहुंची पुलिस के सामने अस्पताल स्टाफ ने यूनिट में उपलब्ध संसाधनों और भर्ती नवजातों की स्थिति की जानकारी दी।
जानकारी के अनुसार शमशाबाद निवासी जितेंद्र सिंह की तीन दिन की बच्ची की तबीयत खराब थी और उसे ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। बच्ची का उपचार पहले एक निजी नर्सिंग होम में चल रहा था। बताया गया कि निजी अस्पताल का खर्च बढ़ने के कारण पिता बच्ची को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए लोहिया अस्पताल पहुंचे।
लोहिया अस्पताल की SNCU में पहुंचने पर स्टाफ ने बताया कि फिलहाल यूनिट में कोई बेड खाली नहीं है। इस पर पिता ने बच्ची को भर्ती करने की मांग की, लेकिन क्षमता से अधिक नवजात भर्ती होने के कारण अस्पताल कर्मियों ने असमर्थता जताई। इससे परेशान पिता ने रात करीब साढ़े आठ बजे डायल-112 पर पुलिस को सूचना दे दी।
कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल स्टाफ से मामले की जानकारी ली। स्टाफ की ओर से पुलिस को बताया गया कि SNCU में महज 16 बेड की क्षमता है, जबकि इस समय 31 नवजात भर्ती हैं। बताया गया कि भर्ती बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता है, जिससे उपलब्ध संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
अस्पताल कर्मियों ने पिता को बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए किसी हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। हालांकि, शुरुआत में पिता बच्ची को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए। पुलिस ने उन्हें अस्पताल की मौजूदा स्थिति और सीमित संसाधनों की जानकारी समझाई। इसके बाद पिता बच्ची को लेकर वापस निजी नर्सिंग होम चले गए।
क्षमता से ज्यादा मरीज, आखिर कैसे संभलेगी व्यवस्था
इस घटना ने जिला अस्पताल की नवजात चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि 16 बेड की क्षमता वाले SNCU में 31 नवजातों का उपचार चल रहा है, तो यह साफ है कि यूनिट पर मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया है। ऐसे में नवजातों के लिए अतिरिक्त बेड, ऑक्सीजन व्यवस्था और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों की जरूरत महसूस की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में गंभीर हालत में नवजातों को सरकारी उपचार की जरूरत पड़ती है, तो सीमित क्षमता वाली SNCU पर बढ़ते मरीजों के दबाव से निपटने के लिए क्या अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं? जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी मौजूदा स्थिति का संज्ञान लेकर नवजात चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

