फर्रुखाबाद।
जल जीवन मिशन के तहत जिले में चल रही पेयजल योजनाओं की धीमी रफ्तार पर जिलाधिकारी महोदया ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को जिला पेयजल एवं स्वच्छता समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और कार्यदायी संस्थाओं को तय समयसीमा में काम पूरा करने के कड़े निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि जनपद में पेयजल योजनाओं के निर्माण एवं संबंधित कार्य दो कार्यदायी संस्थाओं मैसर्स जीवीपीआर तथा मैसर्स वीटीएल गजा द्वारा कराए जा रहे हैं। समीक्षा के दौरान सामने आया कि मैसर्स जीवीपीआर द्वारा अब तक 71 उच्च जलाशयों का निर्माण, 257 ग्रामों में नियमित पेयजल आपूर्ति तथा 64 गांवों में हर घर जल प्रमाणीकरण का कार्य कराया जा चुका है।
इसी प्रकार मैसर्स वीटीएल गजा द्वारा 151 उच्च जलाशयों का निर्माण, 270 ग्रामों में नियमित पेयजल आपूर्ति तथा 195 ग्रामों में हर घर जल प्रमाणीकरण का कार्य पूर्ण कराया जा चुका है।
हालांकि, समीक्षा के दौरान कार्यों की गति को लेकर जिलाधिकारी ने मैसर्स जीवीपीआर को जमकर फटकार लगाई और शेष कार्यों को शीघ्र-अतिशीघ्र एवं निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को स्पष्ट किया गया कि कार्य में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय से कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित फर्म के विरुद्ध Liquidity Damage Penalty लगाने के निर्देश भी दिए गए।
जिलाधिकारी ने योजनाओं पर श्रमिकों की कम संख्या पाए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कार्यदायी संस्था को पर्याप्त संख्या में श्रमिक लगाकर निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए। विशेष रूप से 51 से 100 प्रतिशत तक कार्य पूर्ण हो चुकी 57 पेयजल योजनाओं को सितंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि जिन 71 पेयजल योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, उन्हें बिना किसी देरी के अनुरक्षण एवं संचालन (O&M) में लिया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को सुचारु और निरंतर बनाए रखा जा सके।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। इसलिए निर्माण कार्य के साथ-साथ योजनाओं के संचालन, नियमित जलापूर्ति और हर घर जल प्रमाणीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। बैठक में संबंधित अधिकारियों को योजनाओं की लगातार निगरानी करने और प्रगति की समय-समय पर समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

