रिपोर्ट गोपाल सक्सेना।
राजेपुर/फर्रुखाबाद।
राजेपुर ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय बिरसिंहपुर का विवाद बुधवार को उस समय फिर सुर्खियों में आ गया, जब कक्षा छह से आठ तक के करीब एक सैकड़ा छात्र-छात्राएं स्कूल समय में ही तहसील मुख्यालय अमृतपुर पहुंच गए। बच्चों ने एसडीएम कार्यालय के पास प्रधानाध्यापिका नीलम राठौर के समर्थन में “नीलम मैम जिंदाबाद” के नारे लगाए।

विद्यालय का निर्धारित समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक है। इसके बावजूद छात्र-छात्राएं करीब 11 बजे तहसील मुख्यालय कैसे पहुंच गए, यह सवाल अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। इससे भी गंभीर बात यह सामने आई कि स्कूली बच्चों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से तहसील लाया गया। बच्चों की सुरक्षा को लेकर उपजिलाधिकारी श्वेता साहू ने नाराजगी जताते हुए मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
बच्चों ने प्रशासन के सामने कहा कि उन्हें कोई जबरन तहसील नहीं लाया और वे अपनी मर्जी से आए हैं। वहीं कुछ बच्चों ने ग्राम प्रधान पर प्रधानाध्यापिका को कथित रूप से ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
चार साल से चल रहा विवाद
प्रधानाध्यापिका नीलम राठौर ने बताया कि वर्ष 2022 से ग्राम प्रधान द्वारा उन्हें कथित रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इस संबंध में मुकदमा भी दर्ज है और कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग को प्रार्थना पत्र देकर या तो स्थानांतरण करने अथवा विद्यालय में सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बुधवार को बच्चों के तहसील पहुंचने में अपनी भूमिका से प्रधानाध्यापिका ने साफ इनकार किया। उन्होंने बताया कि वह तीन दिनों की छुट्टी पर हैं।
स्कूल समय में बच्चे तहसील कैसे पहुंचे?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यालय का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक है, तो करीब 11 बजे एक सैकड़ा बच्चे विद्यालय से निकलकर तहसील मुख्यालय कैसे पहुंच गए? यदि बच्चे विद्यालय में मौजूद नहीं थे तो उनकी अनुपस्थिति की जानकारी विद्यालय स्तर पर किसे थी? और यदि बच्चे विद्यालय से निकले तो उन्हें रोकने या सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी थी?
ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे साधन से बच्चों को तहसील लाए जाने की बात ने मामले को और गंभीर बना दिया है। नाबालिग बच्चों को इस तरह सड़क मार्ग से ले जाना उनकी सुरक्षा के लिहाज से बड़ा जोखिम माना जा रहा है।
एसडीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
उपजिलाधिकारी श्वेता साहू ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर नाराजगी जताते हुए लापरवाही बरतने और बच्चों को गुमराह कर जोखिम में डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी राजीव श्रीवास्तव को बच्चों को सुरक्षित वापस भेजने के निर्देश दिए।
बच्चों के साथ नन्ही पत्नी पिंटू, गुड्डी देवी पत्नी मुन्ना सिंह, रनजीत सिंह उर्फ लल्ला पुत्र बाबू सिंह, प्रदीप सिंह पुत्र विश्वनाथ सिंह, जितेन्द्र सिंह पुत्र कंचन सिंह, रामजीत पुत्र ब्रजपाल सिंह और कल्याण सिंह पुत्र भीकमलाल समेत सात लोगों के पहुंचने की बात सामने आई है। रनजीत सिंह वर्तमान बीडीसी सदस्य बताए गए हैं।
बीएसए बोले- होगी विभागीय जांच
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ सिंह ने कहा कि विभाग को बिना पूर्व सूचना बच्चों को गुमराह कर तहसील ले जाने में किसी शिक्षक की भूमिका सामने आती है तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यदि रसोइयों की संलिप्तता पाई जाती है तो सेवा समाप्ति की कार्रवाई होगी। पुराने विवाद की भी विभागीय जांच कराने की बात उन्होंने कही है।
विद्यालय में प्रधानाध्यापिका नीलम राठौर के अलावा सहायक अध्यापक दीपक पटेल तैनात हैं।
चार साल में समाधान क्यों नहीं?
पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि प्रधानाध्यापिका के अनुसार वर्ष 2022 से विवाद चल रहा है, मुकदमा दर्ज है और विभाग को कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए हैं, तो इतने लंबे समय में विवाद का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
अब सवाल सिर्फ बुधवार को बच्चों को तहसील लाए जाने का नहीं, बल्कि यह भी है कि चार साल पुराने विवाद के बावजूद शिक्षा विभाग ने समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाया। यदि समय रहते विवाद का समाधान किया गया होता तो क्या आज नाबालिग बच्चों को स्कूल समय में तहसील तक पहुंचने की नौबत आती?
नौनिहालों को किसी भी व्यक्तिगत, राजनीतिक अथवा प्रशासनिक विवाद का हिस्सा बनाया जाना गंभीर चिंता का विषय है। विद्यालय में बच्चों को सुरक्षित और विवादमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है।
अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक चलने वाले विद्यालय से करीब 11 बजे एक सैकड़ा बच्चे कैसे निकले, उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली से तहसील तक कौन लाया और इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी विद्यालय एवं शिक्षा विभाग के किस अधिकारी को थी। इन सवालों के जवाब ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकेंगे।

