फर्रुखाबाद।
गंगा का जलस्तर भले ही कुछ राहत के संकेत दे रहा हो, लेकिन नदी के किनारों पर जारी भीषण कटान ने ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। जिले में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 137.10 मीटर से महज 15 सेंटीमीटर नीचे 136.95 मीटर पर स्थिर है, बावजूद इसके बाढ़ का संकट टला नहीं है। जिले के 62 गांव बाढ़ की चपेट में हैं और कई गांवों में कटान के चलते ग्रामीणों के आशियाने लगातार गंगा की धार में समाते जा रहे हैं।
दौली की मड़ैया में एक के बाद एक मकान गंगा में समाए
दौली की मड़ैया में गंगा का कटान लगातार कहर बरपा रहा है। यहां बीते दिनों देव सिंह और वीर सिंह के मकान नदी की तेज धार में बह गए। इसके बाद शनिवार को तीन और मकान गंगा में समा गए। देखते ही देखते ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत से खड़े किए गए आशियाने नदी की लहरों में विलीन हो गए। मकान खोने वाले परिवारों के सामने अब रहने और जरूरी सामान बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

47 में 31 मकान निगल चुकी गंगा
सदर तहसील क्षेत्र के दिलीप की मड़ैया में कटान ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। प्रशासन के मुताबिक गांव में कुल 47 आवास थे, जिनमें से 31 मकान अब तक गंगा की धारा में समा चुके हैं। कभी आबाद रहने वाला यह गांव अब उजड़ने की कगार पर पहुंच गया है। फिलहाल यहां हंसराम का पक्का मकान और कुछ झोपड़ियां ही बची हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान इसी रफ्तार से जारी रहा तो बचे हुए आशियाने भी ज्यादा देर सुरक्षित नहीं रह पाएंगे।
बेघर परिवारों को मुआवजे की उम्मीद

कटान से अपना घर गंवा चुके परिवारों को अब प्रशासन से मदद की उम्मीद है। बिलवालपुर के प्रधान रामौतार के बेटे महाराम ने बताया कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी लगातार जमीन काट रही है, ऐसे में समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और राहत उपलब्ध कराने की जरूरत है।
जलस्तर स्थिर, लेकिन खतरा बरकरार
गंगा का जलस्तर स्थिर होने से भले ही बाढ़ की स्थिति में तत्काल बढ़ोतरी नहीं हो रही हो, लेकिन कटान ने खतरा और बढ़ा दिया है। नदी की धार खेतों और आबादी की जमीन को लगातार अपने आगोश में ले रही है। प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों की निगाह अब इस बात पर टिकी है कि गंगा की धार कब शांत होगी और उन्हें अपने उजड़े आशियानों के बीच राहत कब मिलेगी।

