फर्रुखाबाद |
जनपद फर्रुखाबाद में गंगा की कटान ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब तक 25 मकान गंगा की तेज धार में समा चुके हैं। रविवार को भी कटान का कहर जारी रहा और देखते ही देखते पक्के मकान नदी की तेज धारा में बह गए। वर्षों की मेहनत और जिंदगी भर की कमाई से बनाए गए आशियानों को अपनी आंखों के सामने नदी में समाते देख ग्रामीणों में दहशत और बेबसी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार प्रेमलता, प्रेमचंद्र, श्याम, राजेश और नरवीर समेत कई ग्रामीणों के पक्के मकान गंगा की कटान की चपेट में आ चुके हैं। प्रशासन के अनुसार पांच दिनों में अब तक 25 मकान कटान के चलते गंगा में समा चुके हैं। घरों के गिरने का मंजर इतना भयावह है कि ग्रामीण सुरक्षित स्थान की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं।
अपना ही आशियाना तोड़ने को मजबूर हुए ग्रामीण

कटान के बीच सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की सामने आ रही है, जो अपने घरों को बचा पाने में असमर्थ होकर खुद ही अपने हाथों से मकान तोड़ रहे हैं। जिंदगी भर की कमाई और कर्ज लेकर बनाए गए मकानों को ग्रामीण इसलिए तोड़ रहे हैं, ताकि गंगा की धारा में पूरी तरह समाने से पहले ईंट, सरिया, दरवाजे और दूसरी निर्माण सामग्री को बचाया जा सके।
कभी जिस घर को बनाने में परिवार की पूरी जिंदगी की कमाई लग गई थी, आज उसी घर को अपने हाथों से उजाड़ते समय ग्रामीणों की आंखों में बेबसी साफ दिखाई दे रही है। कई परिवारों के सामने अब रहने के लिए सुरक्षित जगह का संकट खड़ा हो गया है।
सुरेश बोले- पांच लाख में बनाया था मकान, अब खुद तोड़ना पड़ रहा।
कटान से प्रभावित सुरेश ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि बीते वर्ष करीब पांच लाख रुपये की लागत से उन्होंने मकान बनवाया था। गंगा की कटान के चलते अब उसी मकान को अपने हाथों से तोड़ना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिस आशियाने को बनाने में इतनी बड़ी रकम खर्च हुई, उसे उजाड़ते समय बेहद पीड़ा हो रही है, लेकिन यदि समय रहते मकान नहीं तोड़ा गया तो भवन में लगी ईंट, सरिया, दरवाजे और अन्य सामान भी गंगा में समा जाएगा।
रामू बोले- मकान तक पहुंच गई गंगा, कभी भी समा सकता है घर
रामू ने बताया कि गंगा अब उनके मकान तक पहुंच गई है। कटान लगातार जारी है और किसी भी समय उनका मकान गंगा की तेज धारा में समा सकता है। ऐसे में परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ ही घर का जरूरी सामान निकालने की जद्दोजहद भी करनी पड़ रही है।
राजू नाव के सहारे बचा रहे मकान की सरिया और ईंट
वहीं राजू ने बताया कि वह नाव के सहारे मकान की सरिया और ईंटें निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि कम से कम निर्माण सामग्री को बचाकर नुकसान को कुछ कम किया जा सके। उनका कहना है कि मकान को बचाना अब संभव नहीं दिखाई दे रहा है, इसलिए घर की बची हुई सामग्री को सुरक्षित निकालना ही एकमात्र रास्ता है।
सामान बचाने की जद्दोजहद, बैलगाड़ी और नाव बनी सहारा
गांव में कटान और जलभराव के कारण ग्रामीणों के सामने अपना सामान सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। लोग बैलगाड़ियों और मोटरबोट के सहारे घर का बचा-खुचा सामान सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं। गांव की गलियां पानी में डूबी हुई हैं। कई घरों में खाना बनाने तक के लिए सूखी जगह नहीं बची है। पानी और कटान के बीच परिवार किसी तरह रात गुजारने को मजबूर हैं।
चारे के अभाव में मवेशियों के सामने भी संकट
बाढ़ और कटान का असर केवल ग्रामीणों तक सीमित नहीं है। घरों के साथ पशुओं के लिए बनी जगहें भी पानी की चपेट में आ गई हैं। चारे की व्यवस्था प्रभावित होने से मवेशियों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सुरक्षित स्थान और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पिछले साल का जख्म अभी भरा भी नहीं था
कई परिवार ऐसे हैं, जो पिछले साल की बाढ़ और कटान में अपना घर-बार गंवा चुके हैं। कुछ परिवार आज भी अस्थायी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल की तबाही से वे पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि इस बार गंगा ने फिर से संकट खड़ा कर दिया।
ग्रामीणों को अब सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि यदि कटान इसी गति से जारी रहा तो आने वाले दिनों में और कितने घर और परिवार इसकी चपेट में आएंगे।
नावों से राहत और बचाव कार्य जारी
इस संबंध में उप जिलाधिकारी सदर ने फोन के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 25 मकान कटान की वजह से गंगा में समा गए हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए पहले दो नावें लगाई गई थीं। इसके बाद चार और अतिरिक्त नावें लगाई गई हैं।
उप जिलाधिकारी ने बताया कि कुछ ग्रामीण अर्रा पहाड़पुर मंडी जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से उनके रहने के लिए वहां व्यवस्था की गई है। वहीं कुछ ग्रामीण अपनी स्वेच्छा से अपने रिश्तेदारों के यहां भी जा रहे हैं। प्रशासन प्रभावित परिवारों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों के मकान गंगा में समा गए हैं, उनके लिए शासन की ओर से जल्द ही मुआवजा दिए जाने की कार्रवाई की जा रही है। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी की जा रही है।
सुरक्षित आश्रय और राहत की मांग
गंगा की तेज धार के बीच जिंदगी और आशियाना दोनों बचाने की जद्दोजहद कर रहे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। ग्रामीणों की मांग है कि कटान प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर आश्रय, भोजन, पीने का पानी और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था और कटान प्रभावित क्षेत्र में प्रभावी बचाव उपाय किए जाएं।
फिलहाल दिलीप की मड़ैया और दौली की मड़ैया में हर गुजरता पल ग्रामीणों के लिए खौफ लेकर आ रहा है। एक तरफ गंगा की तेज धार जमीन काट रही है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण अपने ही हाथों से अपने सपनों का घर उजाड़कर उसकी बची हुई निशानी बचाने में जुटे हैं। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की राहत व्यवस्था और गंगा के घटते-बढ़ते जलस्तर पर टिकी हैं।
