शमशाबाद/फर्रुखाबाद।
नरौरा बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के बाद गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव तैयारियों को तेज कर दिया है। शनिवार को जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कायमगंज तहसील के शमसाबाद क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी हकीकत परखी। डीएम ने अजीजाबाद गांव से लेकर शमसाबाद मंडी के शरणालय स्थल और ढाई घाट तक पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को राहत कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए।

अजीजाबाद में ग्रामीणों से सीधे संवाद, बांटी राहत सामग्री
जिलाधिकारी सबसे पहले बाढ़ प्रभावित अजीजाबाद गांव पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर बाढ़ से उत्पन्न समस्याओं और उनकी जरूरतों की जानकारी ली। ग्रामीणों की परेशानी सुनने के बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री, खाद्यान्न, पीने का पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं समय से पहुंचाई जाएं।
मौके पर जिलाधिकारी ने 50 बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री किट वितरित की। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान प्रभावित परिवारों को किसी भी आवश्यक वस्तु के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए अधिकारी लगातार गांवों में संपर्क बनाए रखें।
कीटनाशक छिड़काव से लेकर मेडिकल कैंप तक के निर्देश
डीएम ने खंड विकास अधिकारी को गांव में नियमित रूप से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी और पशु चिकित्सा अधिकारी को प्रत्येक तीन दिन के अंतराल पर चिकित्सा शिविर आयोजित करने को कहा, ताकि बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों और उनके पशुओं को समय पर उपचार मिल सके।
उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि शिक्षकों के माध्यम से गांव के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न होने दी जाए और उनके अध्ययन कार्य को जारी रखा जाए। डीएम ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्राम प्रधानों के संपर्क में रहकर हर संभव प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
शमसाबाद मंडी के शरणालय में भी पहुंची डीएम की टीम
इसके बाद जिलाधिकारी ने शमसाबाद मंडी में बनाए गए शरणालय स्थल का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए की गई व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की। भोजन, पेयजल, बिजली, साफ-सफाई, शौचालय, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली गई।
डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शरणालय में आने वाले लोगों को समय पर भोजन और स्वच्छ पेयजल मिले। साफ-सफाई की व्यवस्था में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा और सहायता प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नाव-नाविक और राहत उपकरणों की भी ली जानकारी
बढ़ते जलस्तर के बीच जिलाधिकारी ने अधिकारियों से नावों और नाविकों की उपलब्धता के साथ-साथ राहत एवं बचाव उपकरणों की स्थिति की जानकारी ली। स्वास्थ्य विभाग की टीमों की उपलब्धता को लेकर भी उन्होंने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां पहले से पूरी रखी जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया जा सके।
ढाई घाट पहुंचकर गंगा के बढ़ते पानी का लिया जायजा
निरीक्षण के अंतिम चरण में जिलाधिकारी ढाई घाट, शमसाबाद पहुंचे। यहां उन्होंने गंगा नदी के जलस्तर और आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया। संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखने और जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि बाढ़ राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जाए।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की बाढ़ की स्थिति पर पैनी नजर बनी हुई है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
डीएम की अपील—तेज बहाव और जलभराव वाले इलाकों से रहें दूर
जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। जलभराव वाले स्थानों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन को तत्काल सूचना दें।
निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी कायमगंज, खंड विकास अधिकारी शमसाबाद सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
