फर्रुखाबाद न्यूज़:- किसानों की जेब पर डाका तो कहीं घंटों कतार—खाद की किल्लत ने बढ़ाई परेशानी, जबरन सामान थोपने के आरोप |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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कायमगंज/ फर्रुखाबाद |

खरीफ सीजन में फसलों को खाद की जरूरत के बीच कायमगंज क्षेत्र में यूरिया को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। यूरिया लेने के लिए जहां सरकारी इफको केंद्रों पर सुबह से ही किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं, वहीं कुछ किसानों ने निजी दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूले जाने के आरोप लगाए हैं। किसानों का दावा है कि कई निजी दुकानों पर यूरिया की एक बोरी 350 से 400 रुपये तक में बेची जा रही है।

किसानों का आरोप है कि यूरिया की मांग बढ़ने का फायदा उठाकर कुछ दुकानदार मनमानी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कई जगह यूरिया के साथ दूसरे कृषि उत्पाद खरीदने का दबाव बनाए जाने की भी शिकायतें सामने आई हैं। इससे पहले से खेती की बढ़ती लागत से परेशान किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इफको केंद्र पर सुबह से कतार, घंटों इंतजार को मजबूर किसान

निजी दुकानों पर महंगी खाद मिलने की शिकायतों के बीच बड़ी संख्या में किसान सरकारी इफको केंद्र पहुंच रहे हैं। यहां यूरिया लेने के लिए सुबह से लंबी कतारें लग रही हैं। किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। लाइन में खड़े रहने के कारण उनका खेती-किसानी से जुड़ा जरूरी काम भी प्रभावित हो रहा है।

किसान लालाराम ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि इफको केंद्र पर भीड़ अधिक होने के कारण खाद लेने में काफी समय लग जाता है। उनका कहना है कि खेती के जरूरी काम छोड़कर घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। इसी परेशानी के चलते उन्होंने निजी दुकान से 400 रुपये में यूरिया की बोरी खरीदने की बात कही।

इसी तरह किसान गिरीश चंद्र, नीरज, विवेक और प्रभीत ने भी निजी दुकानों पर यूरिया अधिक कीमत में मिलने और अन्य सामान खरीदने के लिए दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए हैं।

प्रभारी बोले—केंद्र पर पर्याप्त खाद उपलब्ध

वहीं इफको केंद्र कायमगंज के प्रभारी सुधीर राजपूत का कहना है कि केंद्र पर यूरिया, डीएपी और एनपीके समेत विभिन्न उर्वरक उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद नियमानुसार उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है।

अब सवाल यह है कि यदि सरकारी केंद्र पर खाद उपलब्ध है तो किसानों को निजी दुकानों पर अधिक कीमत चुकाने की नौबत क्यों आ रही है? किसानों की शिकायतों के बीच निजी दुकानों पर उर्वरक की बिक्री, कीमत और किसानों को दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किए जाने के आरोपों की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। किसानों की मांग है कि जिम्मेदार विभाग बाजार में उर्वरक बिक्री की निगरानी बढ़ाए और यदि कहीं निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली या जबरन सामान बेचने की पुष्टि होती है तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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