कायमगंज/फर्रुखाबाद।
सरकारी अभिलेखों में किसी जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर उसकी संपत्ति की विरासत अपने नाम करा लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कायमगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम पचरौली महादेवपुर निवासी बनवारी सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने ग्राम विकास अधिकारी, जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े अधिकारियों तथा अन्य अज्ञात लोगों की मिलीभगत से उन्हें कागजों में मृत घोषित कर दिया और उनकी जमीन पर विरासत का दावा कर दिया।

शिकायती पत्र के अनुसार, 78 वर्षीय बुजुर्ग बनवारी सिंह का आरोप है कि उनके नाम से कथित तौर पर फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र और परिवार रजिस्टर की प्रतियां तैयार कराई गईं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 1 अप्रैल 2025 को नायब तहसीलदार कम्पिल की अदालत में विरासत संबंधी कार्रवाई शुरू कराई गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित लोगों ने खुद को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उनके जीवित होते हुए उन्हें मृत दर्शाकर जमीन संबंधी दस्तावेजों में अपना दावा पेश किया।
बुजुर्ग के मुताबिक, मामले में वाद संख्या 2010/2025 में शपथ-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर न्यायालय द्वारा 19 मार्च 2026 को धारा 34 के अंतर्गत विरासत का आदेश पारित कर दिया गया। शिकायतकर्ता को पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब वह 10 अगस्त 2026 को कायमगंज तहसील अपने निजी कार्य से पहुंचे और अभिलेख निकलवाए। कागजात देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई—अभिलेखों में उन्हें मृत दर्शाते हुए उनकी संपत्ति पर विरासत की कार्रवाई की जा चुकी थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने संबंधित लोगों से इस संबंध में शिकायत की तो उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया। शिकायती पत्र में कहा गया है कि आरोपियों ने उन्हें यह कहकर डराया कि अभी तो केवल कागजों में मृत दिखाया है, शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी जाएगी।
मामले में ग्राम पचरौली महादेवपुर स्थित कई गाटा नंबरों की भूमि का उल्लेख करते हुए शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोपित लोगों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कराकर उचित कानूनी कार्रवाई किए जाने की गुहार लगाई है।
अभिलेखों की जांच से खुलेगा पूरा राज
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर जीवित व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण-पत्र कैसे तैयार हुआ? परिवार रजिस्टर में उनकी मृत्यु की प्रविष्टि किस आधार पर हुई? और उसी आधार पर जमीन की विरासत की कार्रवाई कैसे आगे बढ़ी? यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी अभिलेखों और महत्वपूर्ण प्रमाण-पत्रों के कथित दुरुपयोग से भी जुड़ जाएगा।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मामले की जांच कराकर दोषियों की भूमिका तय करने और अभिलेखों में हुई कथित गड़बड़ी को दुरुस्त कराने की मांग की है। अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।

