अमृतपुर/फर्रुखाबाद।
गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने अमृतपुर तहसील क्षेत्र में हालात बेहद भयावह कर दिए हैं। ऊपरी क्षेत्रों से छोड़े जा रहे पानी के चलते बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। हमीरपुर, बरुआ, इमादपुर सोमवंशी, बुड़िया भेड़ा, नगरिया जवाहर, जगतपुर, सबलपुर, उदयपुर, आशा की मढ़ैया, पूर्वी गोटिया, पश्चिमी गोटिया, चित्रकूट, अमरपुर, तीसराम की मढ़ैया और खानपुर सहित दर्जनों गांव चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। कई गांवों में घरों के भीतर तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है, जिससे लोगों का सामान्य जीवन पूरी तरह ठप हो गया है।

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। हजारों बीघा खेतों में खड़ी फसलें पानी में समा गई हैं, जबकि पशुओं के लिए रखा हरा चारा भी बाढ़ की भेंट चढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि कई परिवार अपने मवेशियों के साथ फर्रुखाबाद-बदायूं स्टेट हाईवे के किनारे पॉलिथीन और तिरपाल डालकर अस्थायी आशियाना बनाने को मजबूर हैं। खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजार रहे इन परिवारों के सामने भोजन, पीने के पानी और पशुओं के चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
आशा की मढ़ैया गांव का संपर्क लगभग पूरी तरह कट चुका है। गांव तक पहुंचने का एकमात्र सहारा अब नाव ही बची है। वहीं चित्रकूट स्थित प्रसिद्ध घाटू श्याम मंदिर भी बाढ़ के पानी से घिर गया है। मंदिर के पुजारी सुखदेव ने बताया कि श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं की सुविधा के लिए लेखपाल द्वारा नाव की व्यवस्था कराई गई है, जिससे लोग किसी तरह मंदिर तक पहुंच पा रहे हैं।

चित्रकूट गांव के निवासी महेश ने प्रशासन पर राहत कार्यों में लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अब तक न तो राहत सामग्री मिली है और न ही पशुओं के लिए चारे की कोई व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं और परिवार सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं। महेश के साथ संतोष, ओमकार, रमाकांत, जयपाल, पप्पू, रामादेवी, पवन कुमार, गिरीश और हरिराम सहित कई ग्रामीणों ने भी तत्काल राहत और पुनर्वास की मांग की।
मौके पर पहुंचे लेखपाल पवन कुमार और रविंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था गंगापार स्थित महात्मा गांधी इंटर कॉलेज, राजेपुर में की गई है। हालांकि कई ग्रामीण अपने घर और मवेशी छोड़कर राहत शिविर जाने को तैयार नहीं हैं। पुलिस प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए समझा रहा है।
उधर चित्रकूट डिप पर करीब तीन फीट पानी बहने के बावजूद लोग बाइक, टेंपो और चारपहिया वाहनों से जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह ने बताया कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए डिप पर बैरिकेडिंग कर मार्ग बंद किया जाएगा। इसके बाद वाहनों का संचालन राजेपुर-डाबरी, जमापुर और शाहजहांपुर मार्ग से कराया जाएगा।
बुड़िया भेड़ा से इमादपुर को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग भी बाढ़ के कारण पूरी तरह बंद हो चुका है। वहीं सबलपुर गांव के पास स्वास्थ्य विभाग ने अस्थायी स्वास्थ्य शिविर स्थापित कर बाढ़ प्रभावित लोगों को दवाइयां उपलब्ध करानी शुरू कर दी हैं।
गंगा का लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि जलस्तर में जल्द कमी नहीं आई तो और अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री, पशुओं के लिए चारा, दवा, सुरक्षित आश्रय और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। पूरे अमृतपुर क्षेत्र में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है और लोगों की निगाहें अब प्रशासन की त्वरित राहत कार्रवाई पर टिकी हैं।
