ग्रामीणों का हल्लाबोल: 35 वर्षों से ग्राम समाज की 500 बीघा जमीन पर भू-माफिया का कब्जा, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा |

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कायमगंज/फर्रुखाबाद/

ग्राम बराकेशव में पिछले करीब 35 वर्षों से लंबित चकबंदी प्रक्रिया अब ग्रामीणों के गुस्से का बड़ा मुद्दा बन गई है। वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीण अब खुलकर सामने आ गए हैं और उन्होंने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में चकबंदी की प्रक्रिया करीब तीन दशक पहले शुरू हुई थी, लेकिन आज तक उसे पूरा नहीं कराया गया। इस लंबित प्रक्रिया का फायदा उठाकर गांव के कुछ भू-माफिया, दबंग और बड़े काश्तकार लगातार सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाए हुए हैं।

500 एकड़ ग्राम समाज भूमि पर कब्जे का आरोप

शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गांव की लगभग 500 एकड़ ग्राम समाज की जमीन पर प्रभावशाली लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी पूरी न होने की वजह से इन कब्जों को हटाने की कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक संरक्षण और प्रभाव का इस्तेमाल कर चकबंदी प्रक्रिया को जानबूझकर वर्षों से रोका जा रहा है ताकि उनका अवैध कब्जा बना रहे।

छोटे किसान सबसे ज्यादा परेशान

चकबंदी अधूरी होने के कारण गांव में खेतों तक पहुंचने के लिए सही रास्ते (चकमार्ग) नहीं बन पाए हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ रहा है।

कई किसानों का कहना है कि उन्हें अपने खेतों तक पहुंचने के लिए दूसरे किसानों की जमीन से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे आए दिन विवाद की स्थिति बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो गांव में बड़ा तनाव पैदा हो सकता है।

जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जल्द से जल्द चकबंदी प्रक्रिया को पूरा कराया जाए और ग्राम समाज की जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि “35 साल से गांव का विकास रुका हुआ है। अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा तो गरीब किसानों का हक हमेशा के लिए छिन जाएगा।”

ग्रामीणों की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस बड़ी शिकायत पर क्या कदम उठाता है और बराकेशव के किसानों को आखिर कब न्याय मिल पाता है।

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