आशु स्वीट्स की मिठाई में कीड़े मिलने के आरोप से हड़कंप, सीसीटीवी जांच की उठी मांग
मिठाई में कीड़े मिलने के आरोप से हड़कंप, आशु स्वीट्स पर उठे सवाल
ग्राहक ने कोतवाली नगर में दी तहरीर, दुकानदार पर मिठाई बदलने की बात कहने का आरोप; सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग
जनरल फोर्स ब्यूरो
एटा। रक्षाबंधन के त्योहार से पहले मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। कोतवाली नगर क्षेत्र के समीप हाथी गेट स्थित नामचीन आशु स्वीट्स पर एक ग्राहक ने मिठाई में कीड़े निकलने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद ग्राहक ने कोतवाली नगर पहुंचकर तहरीर दी और मामले में कार्रवाई की मांग की है।
ग्राहक का आरोप है कि आशु स्वीट्स से खरीदी गई मिठाई में कीड़े दिखाई दिए। जब उसने इसकी शिकायत दुकान पर की तो कथित तौर पर दुकानदार की ओर से मिठाई बदलने की बात कही गई। मामला बढ़ने के बाद ग्राहक पुलिस के पास पहुंच गया। अब इस शिकायत ने त्योहार के दौरान बिक रही मिठाइयों की गुणवत्ता और खाद्य विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़ा सवाल— क्या जांच के समय मिलेगी वही मिठाई?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि खाद्य विभाग जांच के लिए आशु स्वीट्स पहुंचता है तो क्या कथित तौर पर कीड़े वाली मिठाई वहां मौजूद मिलेगी, या शिकायत और विवाद के बाद उसे काउंटर से हटा दिया गया होगा?
यदि मिठाई बदले जाने की बात सामने आई है तो जांच सिर्फ काउंटर पर रखी मौजूदा मिठाइयों के नमूने लेने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता से पड़ताल किए जाने की जरूरत है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत के बाद संबंधित मिठाई के साथ क्या किया गया।
सीसीटीवी फुटेज भी बने जांच का हिस्सा
मामले में दुकान के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की मांग भी उठ रही है। यदि घटना के समय की फुटेज उपलब्ध है तो उससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि ग्राहक ने कौन सी मिठाई दिखाई, शिकायत के बाद दुकान पर क्या हुआ और संबंधित मिठाई को बदला या हटाया गया अथवा नहीं।
ऐसे में जांच अधिकारियों को दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की घटना से पहले और शिकायत के बाद की फुटेज सुरक्षित कराने और उसकी जांच पर भी ध्यान देना चाहिए। फुटेज उपलब्ध होने की स्थिति में वह पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
सिर्फ सैंपलिंग नहीं, स्टॉक की भी हो पड़ताल
त्योहारों के दौरान खाद्य विभाग द्वारा मिलावट और खराब खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं। लेकिन इस मामले में सवाल यह है कि क्या कार्रवाई सिर्फ औपचारिक सैंपलिंग तक सीमित रहेगी या दुकान में मौजूद मिठाइयों के स्टॉक, निर्माण और भंडारण की स्थिति तथा संबंधित बैच की भी जांच की जाएगी?
ग्राहक की शिकायत के बाद खाद्य विभाग के सामने एक मौका है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करे। यदि आरोप गलत हैं तो जांच से स्थिति साफ हो सकती है और यदि खाद्य गुणवत्ता से जुड़ी अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।
डीएम के निर्देशों के बीच खाद्य विभाग पर सवाल
डीएम अरविंद सिंह के सख्त निर्देशों के बावजूद यदि शिकायत के बाद भी खाद्य विभाग की सक्रियता धरातल पर नजर नहीं आती, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या अधिकारियों की निगरानी सिर्फ एसी दफ्तरों तक सीमित रहेगी, या वे बाजार में उतरकर त्योहार के समय बिक रही मिठाइयों की वास्तविकता भी जांचेंगे?
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर मिठाइयों की बिक्री काफी बढ़ जाती है। ऐसे में खराब या संदिग्ध खाद्य पदार्थों की शिकायत मिलने पर तत्काल जांच जरूरी है।
अब कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल ग्राहक की तहरीर के बाद पूरे मामले में पुलिस और खाद्य विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर है। अब देखना होगा कि विभाग मौके पर पहुंचकर क्या कार्रवाई करता है, कथित मिठाई का नमूना मिलता है या नहीं, दुकान के स्टॉक की जांच होती है या नहीं और सीसीटीवी फुटेज के जरिए शिकायत के बाद हुए घटनाक्रम की पड़ताल की जाती है या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—शिकायत के बाद अगर मिठाई बदल दी गई, तो सच सामने लाने के लिए सीसीटीवी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कब होगी?
नोट: मिठाई में कीड़े मिलने संबंधी आरोप ग्राहक की शिकायत और तहरीर पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सक्षम विभाग की जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

