पीडब्ल्यूडी की ‘पुलिया’ या सिर्फ खानापूर्ति? बिना जोड़े पाइप दबाकर निपटा दिया काम, जल निकासी पर बड़ा सवाल |

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फर्रुखाबाद।

तहसील अमृतपुर क्षेत्र के ग्राम बलीपट्टी रानीगांव में जल निकासी की समस्या के समाधान के नाम पर पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गांव में पुलिया निर्माण और पानी निकासी की व्यवस्था कराने पहुंचा विभाग ऐसा काम कर गया, जिसे ग्रामीण खुली “खानापूर्ति” बता रहे हैं। आरोप है कि विभाग ने बिना किसी तकनीकी मानक का पालन किए केवल सड़क काटकर ह्यूम पाइप गड्ढे में दबा दिए और मिट्टी डालकर काम खत्म मान लिया।

बताया गया कि गांव के एक निवासी ने जिलाधिकारी से जल निकासी और पुलिया निर्माण की शिकायत की थी। शिकायत के बाद बुधवार को पीडब्ल्यूडी विभाग ने गांव के मुख्य मार्ग पर जेसीबी से सड़क कटवाकर ह्यूम पाइप डलवाए। मौके पर नायब तहसीलदार अभिषेक सिंह, पीडब्ल्यूडी के जेई वीर बहादुर और थाना अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।

न पाइप जुड़े, न निकासी का रास्ता—फिर कैसे निकलेगा पानी?

ग्रामीणों के मुताबिक, विभाग ने करीब दो फीट नीचे गड्ढा खोदकर पाइप डाल दिए, लेकिन सबसे हैरानी की बात यह रही कि पाइपों को आपस में किसी प्रकार से जोड़ा तक नहीं गया। पाइप डालने के बाद जेसीबी से ऊपर मिट्टी डलवा दी गई, मानो सिर्फ औपचारिकता निभाई गई हो।

इतना ही नहीं, जिस दिशा में पाइप दबाए गए हैं, वहां जल निकासी की कोई स्पष्ट व्यवस्था भी नजर नहीं आती। एक तरफ तहसील परिसर की दीवार खड़ी है तो दूसरी ओर रास्ता मौजूद है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर पानी निकलेगा कहां से? ग्रामीणों का कहना है कि मौके की स्थिति देखकर जल निकासी संभव ही नहीं लगती और पूरा काम सिर्फ दिखावे के लिए किया गया प्रतीत होता है।

जेई ने साधी चुप्पी, अफसरों के बयान अलग-अलग

जब इस संबंध में पीडब्ल्यूडी विभाग के जूनियर इंजीनियर वीर बहादुर से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। वहीं नायब तहसीलदार अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि वह उपजिलाधिकारी के निर्देश पर केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर मौजूद थे।

उपजिलाधिकारी अमृतपुर रविंद्र सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा जल निकासी के लिए पुलिया निर्माण कराया जा रहा है।

उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने कहा कि नई पुलिया बनाई जा रही है और तहसील की ओर एक चैंबर बनाकर कार्य को दुरुस्त कराया जाएगा।

बड़ा सवाल—जब सुधार बाद में करना था, तो पहले अधूरा काम क्यों?

अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि पुलिया निर्माण कराया जा रहा था तो पाइपों को बिना जोड़े और बिना निकासी मार्ग सुनिश्चित किए गड्ढे में दबाने की क्या मजबूरी थी? क्या विभाग ने सिर्फ जिलाधिकारी के निर्देश की औपचारिकता पूरी करने के लिए यह काम किया? ग्रामीणों में इस कार्य को लेकर नाराजगी है और वे पूरे मामले की जांच के साथ मानक के अनुरूप स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

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