फर्रुखाबाद न्यूज़:- हर घर नल से जल योजना; टोटियां बनीं शोपीस, करोड़ों खर्च फिर भी बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण |

By
Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
3 Min Read

कायमगंज/फर्रुखाबाद |

सरकार की महत्वाकांक्षी “हर घर नल से जल” योजना गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन कायमगंज क्षेत्र के गांव कटरा रहमत खां में यह योजना सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का बड़ा अंतर उजागर कर रही है। करीब ₹3.34 करोड़ की लागत से बनी पानी की टंकी, पंप हाउस, सोलर प्लांट और पूरे गांव में बिछाई गई पाइपलाइन आज भी ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझा सकी है। निर्माण कार्य पूरा हुए लगभग चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन घरों के बाहर लगी नलों की टोटियां आज भी केवल शोपीस बनकर रह गई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि योजना के शुरू होने की उम्मीद में लोगों ने खुशी-खुशी अपने घरों में नल लगवाए थे, लेकिन आज तक उनमें पानी की एक बूंद भी नहीं आई। इससे लोगों में शासन-प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित विभाग केवल आश्वासन देते रहे, लेकिन पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं कराई गई।

सबसे हैरानी की बात यह है कि अब विभाग की ओर से देरी की वजह सोलर प्लांट पर पेड़ की छाया पड़ना बताई जा रही है। जल जीवन मिशन के सहायक अभियंता नितिन वर्मा के अनुसार टंकी परिसर में लगे सोलर प्लांट पर पास के पेड़ की छाया पड़ने से पर्याप्त धूप नहीं मिल रही, जिससे प्लांट पूरी क्षमता से चार्ज नहीं हो पा रहा और पानी की सप्लाई बाधित है। उन्होंने दावा किया कि समस्या का शीघ्र समाधान कराया जाएगा।

हालांकि ग्रामीण इस तर्क पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सोलर प्लांट के लिए स्थान चयन और तकनीकी परीक्षण सही ढंग से किया गया होता तो ऐसी स्थिति ही पैदा नहीं होती। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि एक पेड़ की छाया पूरी योजना पर भारी पड़ जाए, तो यह निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिर चार वर्षों तक योजना शुरू न होने की जिम्मेदारी किसकी है। लोगों का कहना है कि दोषी अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें।

अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों रुपये की यह योजना सरकारी लापरवाही का प्रतीक बनकर रह जाएगी और ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल के लिए पुराने संसाधनों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।

Subscribe Newsletter

Loading
Share This Article
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *