फर्रुखाबाद।
मंडियों में अवैध कब्जा जमाकर कारोबार करने वालों की अब खैर नहीं। सातनपुर मंडी और अर्रापहाड़पुर स्थित सब्जी एवं फल मंडी में फैले अतिक्रमण को लेकर मंडी प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। दोनों मंडियों में करीब 115 अवैध दुकानों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। दुकानों पर नोटिस चस्पा करने के साथ ही लाल निशान भी लगाए गए हैं। मंडी प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि दुकानदारों ने स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाया तो दूसरे नोटिस के बाद बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण ध्वस्त कराया जाएगा।
मंगलवार को मंडी प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अवैध कब्जेदारों में खलबली मच गई है। वहीं लंबे समय से अतिक्रमण के कारण परेशान किसानों और पंजीकृत व्यापारियों को अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
115 दुकानों पर चस्पा हुआ नोटिस, लाल निशान से हुई पहचान
मंडी सचिव अनूप कुमार दीक्षित ने मंगलवार दोपहर करीब एक बजे बताया कि दोनों मंडियों में अवैध रूप से संचालित दुकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब 115 दुकानों पर पहला नोटिस चस्पा किया जा चुका है। इसके बाद दुकानदारों को अतिक्रमण हटाने के लिए दूसरा नोटिस दिया जाएगा।
मंडी प्रशासन ने दुकानों पर लाल निशान लगवाकर अवैध कब्जों की पहचान भी कराई है। अधिकारियों के मुताबिक, नोटिस की समयसीमा के बाद भी यदि दुकानदारों ने कब्जा नहीं हटाया तो प्रशासन अपने स्तर से कार्रवाई करेगा। ऐसे में अवैध दुकानों पर बुलडोजर चलने की संभावना बढ़ गई है।
गेट से आखिरी छोर तक कब्जे, लोहे और लकड़ी की दुकानें बनीं मुसीबत
कादरीगेट थाना क्षेत्र की सातनपुर मंडी और मऊदरवाजा थाना क्षेत्र की अर्रापहाड़पुर सब्जी एवं फल मंडी में लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है। बताया जा रहा है कि मंडियों के प्रवेश द्वार से लेकर आखिरी छोर तक कई स्थानों पर लोहे और लकड़ी की स्थायी दुकानें खड़ी कर दी गई हैं।
इन दुकानों के कारण मंडियों के भीतर आवागमन बाधित हो रहा है। कारोबारियों और किसानों के वाहनों को निकलने में परेशानी होती है। मंडी परिसर में व्यापारिक गतिविधियों के लिए निर्धारित स्थानों पर अवैध कब्जे होने से व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
सातनपुर मंडी में 250 दुकानें, 800 लाइसेंसधारक
सातनपुर मंडी में करीब 250 दुकानें हैं, जबकि यहां लगभग 800 लाइसेंसधारक कारोबार करते हैं। दूसरी ओर अर्रापहाड़पुर स्थित सब्जी एवं फल मंडी में करीब 25 दुकानें और लगभग 250 लाइसेंसधारक हैं।
इतनी बड़ी संख्या में किसानों, व्यापारियों और लाइसेंसधारकों की आवाजाही के बावजूद मंडियों में अवैध कब्जों का फैलाव लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है। मंडी प्रशासन की कार्रवाई को इसी समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
किसानों को सब्जी बेचने और व्यापारियों को वाहन खड़े करने में परेशानी
मंडी में अतिक्रमण का सबसे ज्यादा असर किसानों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। दूरदराज के गांवों से सब्जियां लेकर आने वाले किसानों को मंडी परिसर में अपना माल उतारने और वाहनों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती।
सब्जी खरीदने आने वाले ग्रामीण दुकानदारों को भी वाहन खड़े करने में परेशानी उठानी पड़ती है। मंडी परिसर में जगह-जगह अवैध दुकानें होने से कारोबारियों को अपने कामकाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जाता है कि दोपहर में कारोबार बंद होने के बाद कई दुकानदार अपनी दुकानों पर ताला लगाकर चले जाते हैं, जिससे मंडी परिसर में जगह का उपयोग भी प्रभावित होता है। अतिक्रमण के चलते किसानों और पंजीकृत फर्मों के व्यापारियों को होने वाली परेशानी अब मंडी प्रशासन की कार्रवाई का प्रमुख आधार बन रही है।
राजनीतिक रसूख के सहारे कब्जे की चर्चा
मंडी क्षेत्र में कुछ अवैध दुकानदारों के राजनीतिक पहुंच रखने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि, इस संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मंडी प्रशासन की कार्रवाई कितनी निष्पक्ष और प्रभावी रहती है, इस पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
दूसरे नोटिस के बाद होगी निर्णायक कार्रवाई
मंडी प्रशासन की ओर से पहले नोटिस चस्पा किए जाने के बाद अब दूसरे नोटिस की तैयारी है। इसके बाद भी यदि अवैध कब्जेदार स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी।
करीब 115 दुकानों पर लाल निशान लगने के बाद मंडी क्षेत्र में कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सवाल यह है कि कितने दुकानदार खुद ही कब्जा हटाकर प्रशासन का सहयोग करेंगे और कितने लोगों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलेगा।
