तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और पार्टी में विभाजन के मामले पर अपना पक्ष रखते हुए अलग हुए गुट को मान्यता दिए जाने का विरोध किया।
बनर्जी ने बताया कि टीएमसी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य करार देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के सामने 20 याचिकाएं दायर की गईं। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से कहा कि सांसद अपने आप किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते, इसकी वजह से उन्हें अयोग्य करार दिया जाना जाहिए। अभिषेक के साथ स्पीकर से मिलने वालों में कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा भी शामिल थे। स्पीकर से अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अकेले सांसद किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते हैं।
ओम बिरला से मिलने के बाद, सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, “टीएमसी के 20 सांसद 3-4 दिन पहले स्पीकर ओम बिरला से मिले थे और अपना अलग ग्रुप बनाने का दावा किया था। मीडिया के मुताबिक, उन्होंने दावा किया है कि उनके साथ एक अलग ग्रुप जैसा बर्ताव किया जा रहा है। फिर उनमें से दो से चार ने कुछ घंटों बाद NCPI में मर्ज होने का दावा किया। मैंने, TMC के लोकसभा नेता के तौर पर, 20 अलग-अलग अयोग्यता पिटीशन दी हैं। 10वें शेड्यूल उनके खिलाफ है, इन लोगों के खिलाफ है जो अलग ग्रुप बनाने का दावा करते हैं। अगर उनमें थोड़ी भी ईमानदारी है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
अभिषेक बनर्जी ने आगे कहा, “हम कोर्ट जाएं या कोई लीगल तरीका ढूंढें, यह एक काल्पनिक सवाल है। लेकिन हमने इसे स्पीकर के फैसले और समझदारी पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि वह दूसरे पक्ष को भी सुनेंगे और फिर हमें दोबारा बुलाएंगे। मुझे उम्मीद है कि लोकसभा स्पीकर संविधान के हिसाब से काम करेंगे और संविधान का गला नहीं घोंटेंगे।
बिरला ने तृणमूल कांग्रेस के निचले सदन में नेता बनर्जी को इस पूरे मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया था। यह मामला 20 बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों द्वारा खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग से जुड़ा है, जिन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ विलय किया है। 10 जून को अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि किसी भी ऐसे समूह को मान्यता, दर्जा या संसदीय सुविधा न दी जाए जो खुद को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) से अलग गुट बताता है।
पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने रविवार को बिरला के आवास पर जाकर यह पत्र उन्हें सौंपा था। बनर्जी ने अपने पत्र में कहा था, ”तृणमूल कांग्रेस को सदन में उसके विधिवत अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र राजनीतिक दल के रूप में माना जाए तथा किसी भी कथित अलग समूह या गुट को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या सहूलियत देने से इनकार किया जाए।
उन्होंने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से जुड़े सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अब विभाजन का बचाव करने का रास्ता नहीं बचा है और मौजूदा कानूनी व्यवस्था एक समूचे राजनीतिक दल को मान्यता देती है, न कि उसके भीतर प्रतिद्वंद्वी गुटों को। उन्होंने यह भी कहा था, ”यदि इस प्रकार का कोई अनुरोध प्राप्त होता है तो उसपर कोई भी निर्णय लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
