फर्रुखाबाद।
सड़कों पर छुट्टा गोवंश के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और आमजन की परेशानियों को लेकर जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गोवंश को पकड़कर गौशालाओं में संरक्षित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने चार टीमें गठित कर अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही साफ चेतावनी दी है कि अभियान के एक सप्ताह बाद भी यदि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर छुट्टा गोवंश विचरण करते पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्ट्रेट सभागार फतेहगढ़ में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद में संचालित गोवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, गोवंश संरक्षण तथा उनके भरण-पोषण की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को दो टूक कहा कि निराश्रित गोवंश का संरक्षण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर इसका प्रभाव दिखाई देना चाहिए। गौशालाओं में संरक्षित गोवंश को पर्याप्त चारा, पानी, चिकित्सा और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
चार टीमें संभालेंगी मोर्चा, सड़कों से गौशालाओं तक पहुंचेगा गोवंश
जिलाधिकारी ने नगर क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में घूम रहे छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए चार टीमों का गठन कर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गठित टीमें नियमित रूप से अभियान चलाएं और पकड़े गए गोवंश को निकटवर्ती गौवंश आश्रय स्थलों में सुरक्षित पहुंचाना सुनिश्चित करें।
डीएम ने स्पष्ट किया कि केवल पशुओं को पकड़ना ही अभियान का उद्देश्य नहीं होगा, बल्कि उनकी पहचान कर यह भी पता लगाया जाएगा कि वे पहले किस पशुपालक के पास थे। इसके लिए पकड़े गए गोवंश की ईयर टैगिंग के माध्यम से ट्रेसिंग कराई जाएगी। यदि कोई पशु पूर्व में किसी पशुपालक का पाया जाता है और उसे जानबूझकर निराश्रित छोड़ा गया है, तो संबंधित पशुपालक के विरुद्ध पुलिस के माध्यम से सुसंगत धाराओं में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एक सप्ताह बाद सड़कों पर मिला गोवंश तो अफसरों पर गिरेगी गाज
छुट्टा गोवंश की समस्या को लेकर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट समयसीमा भी निर्धारित कर दी है। उन्होंने कहा कि अभियान चलने के एक सप्ताह बाद यदि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर छुट्टा गोवंश के विचरण की शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
डीएम ने कहा कि छुट्टा पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। आमजन को इस समस्या से राहत दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है। अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अभियान की नियमित निगरानी करें और गोवंश संरक्षण के कार्यों में तेजी लाएं।
सरकारी जमीन पर चारा उगाने वालों का होगा चिन्हांकन
बैठक में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से चारा उगाए जाने का मामला भी उठा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सरकारी भूमि पर उगाए गए चारे की कटाई कराई जाए तथा जिन व्यक्तियों द्वारा सरकारी जमीन पर चारा उगाया गया है, उनका चिन्हांकन कर विस्तृत आख्या उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि का उपयोग नियमानुसार होना चाहिए। संबंधित अधिकारी इस मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे अथवा अनधिकृत उपयोग की स्थिति समाप्त की जा सके।
गौशालाओं में सर्दी से पहले होंगे पुख्ता इंतजाम
आगामी शीत ऋतु को देखते हुए जिलाधिकारी ने गौशालाओं में ठंड से बचाव के लिए विशेष व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी गौशालाओं में टीनशेड, अलाव, आवश्यक दवाइयां, स्वच्छ पेयजल और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गौशालाओं में पर्याप्त हरा और सूखा चारा उपलब्ध रहे। गोवंश के स्वास्थ्य परीक्षण और समय से उपचार की व्यवस्था की जाए। साथ ही साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे ठंड के मौसम में किसी भी गोवंश को परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने सभी गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे स्थापित कराने और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि शीत ऋतु शुरू होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाएं और गौशालाओं का नियमित निरीक्षण किया जाए।
26 गौशालाओं में 8257 गोवंश संरक्षित, 2528 लाभार्थियों को मिले 5397 गोवंश
बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धीरज कुमार ने जनपद में गोवंश संरक्षण की प्रगति से जिलाधिकारी को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जनपद में वर्तमान में कुल 26 गौवंश आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 8257 गोवंश संरक्षित किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत जनपद के 2528 लाभार्थियों को कुल 5397 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को गोवंश उपलब्ध कराकर उनके संरक्षण और भरण-पोषण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कुपोषित परिवारों को उपलब्ध कराई जाएंगी दुधारू गायें
जिलाधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों को अपने-अपने विकासखंड क्षेत्र में संचालित गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान गोवंश के स्वास्थ्य, चारे, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाए।
डीएम ने गौशालाओं में उपलब्ध दुधारू गायों को कुपोषित परिवारों को उपलब्ध कराने की कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। इससे जरूरतमंद परिवारों को पोषण संबंधी लाभ मिल सकेगा और गोवंश का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
संरक्षण कार्यों में लापरवाही पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कहा कि निराश्रित गोवंश का संरक्षण शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। गौशालाओं में प्रत्येक गोवंश के लिए पर्याप्त चारा, पानी, चिकित्सा और सुरक्षित आवास की व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोवंश संरक्षण से संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा करें और शासन की मंशा के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, जिला विकास अधिकारी श्याम कुमार तिवारी, उपनिदेशक कृषि अरविंद मोहन, जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका विनोद कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धीरज कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
