फर्रुखाबाद/
इटावा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत प्रस्तावित फोरलेन सड़क एवं पुल निर्माण कार्य से प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। पांचालघाट बंधा स्थित ग्राम पट्टी सोता बहादुरपुर के सैकड़ों ग्रामीण अपने मकान और जमीन बचाने की मांग को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंच गए। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि फोरलेन हाईवे परियोजना के कारण उनके घर, कृषि भूमि और आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। वर्षों से बसे परिवार बेघर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उचित मुआवजे की व्यवस्था किए बिना उन्हें उजाड़ना न्यायसंगत नहीं होगा।
जमीन के बदले जमीन और पुनर्वास की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि जिन परिवारों की जमीन परियोजना में अधिग्रहित की जा रही है, उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही जमीन के बदले दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्रभावित परिवार सम्मानपूर्वक अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकें। ग्रामीणों का कहना है कि केवल आर्थिक मुआवजा उनकी वर्षों पुरानी बसावट और जीवनभर की मेहनत का विकल्प नहीं हो सकता।
सैकड़ों परिवारों के सामने खड़ा हुआ विस्थापन का संकट
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि गांव के कई परिवार पूरी तरह से इस परियोजना की जद में आ रहे हैं। यदि समय रहते पुनर्वास की योजना नहीं बनाई गई तो बड़ी संख्या में लोग बेघर हो जाएंगे। उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा करने की मांग की।
पुष्पेंद्र सिंह के नेतृत्व में जुटे ग्रामीण
ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पुष्पेंद्र सिंह ने किया। इस दौरान रुचि, पूनम, निशु, प्रियंका, रश्मि, माया, कुसुम, रीता, जितेंद्र कुमार, सरला देवी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
प्रशासन से न्याय की उम्मीद
नगर मजिस्ट्रेट को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की कि प्रशासन परियोजना से प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करे और उन्हें राहत प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर किसी भी परिवार को बिना उचित व्यवस्था के बेघर नहीं किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
