फर्रुखाबाद।
मोहर्रम की सातवीं तारीख पर इमाम हुसैन और उनके काफिले की प्यास और कुर्बानी की याद में निकाले गए मातमी जुलूस ने हर अकीदतमंद की आंखें नम कर दीं। शाम-ए-गरीबा से अलम-ए-हजरत अब्बास और गहवारा-ए-अली असगर का जुलूस श्रद्धा और अकीदत के साथ बरामद हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर कर्बला के दर्दनाक वाकये को याद किया।
जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हसन ईरानी ने कहा कि सात मोहर्रम से यजीदी फौज ने फरात नदी का पानी बंद कर दिया था। इसके बाद इमाम हुसैन के खेमों में मौजूद मासूम बच्चों और महिलाओं की प्यास की सदाएं “अलअतश… अलअतश” (प्यास… प्यास) हर तरफ गूंजने लगी थीं। उन्होंने कहा कि कर्बला का यह दर्दनाक मंजर इंसानियत को जुल्म के खिलाफ डटकर खड़े होने और सच्चाई का साथ देने का संदेश देता है।
मजलिस में मौलाना फरहत अली जैदी और मौलाना सदाकत हुसैन ने भी कर्बला की शहादतों और इमाम हुसैन की कुर्बानियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोहर्रम केवल गम का महीना नहीं, बल्कि इंसाफ, सब्र, त्याग और मानवता की रक्षा का पैगाम भी देता है।
मजलिस के दौरान कर्बला के हालात का बयान होते ही माहौल गमगीन हो गया। अकीदतमंदों की आंखों से आंसू बह निकले और “या हुसैन” की सदाओं से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। जुलूस में शामिल लोगों ने मातम कर शहीदाने कर्बला को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर ऑल इंडिया शिया मुस्लिम महासभा के जिलाध्यक्ष सैय्यद अम्मार अली जैदी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष आफताब हुसैन, पूर्व नगर अध्यक्ष नफीस हुसैन, सुनहरी मस्जिद के सदर मुन्नवर हुसैन, हुसैनी टाइगर के जिलाध्यक्ष मुन्तजिर हुसैन जैदी, मसरत अली जैदी, रहबर आब्दी, अली यावर जैदी, जावेद हुसैन, इंतजार हुसैन, मोहसिन काजमी, मुदस्सर काजमी, हुसैन अली जैदी, अली मोहम्मद, शोएब जैदी, सैफ हुसैन, यूसुफ जैदी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समापन शहीदाने कर्बला की याद में दुआ और सलाम के साथ हुआ। पूरे आयोजन में गम, अकीदत और इंसानियत का संदेश साफ तौर पर दिखाई दिया।
