लुईस खुर्शीद को एमपी-एमएलए कोर्ट से बड़ी राहत, गैर-जमानती वारंट हुआ निरस्त |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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फर्रुखाबाद/

दिव्यांगों को उपकरण वितरण में कथित अनियमितताओं और धन के गबन से जुड़े चर्चित मामले में पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी एवं डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट की परियोजना निदेशक रहीं लुईस खुर्शीद को अदालत से बड़ी राहत मिली है। फर्रुखाबाद स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ पूर्व में जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को निरस्त कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 5 जुलाई को होगी।

लुईस खुर्शीद स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुईं, जहां उनके अधिवक्ता ने वारंट वापस लिए जाने की प्रार्थना करते हुए अदालत के समक्ष पक्ष रखा। दलीलों पर विचार करने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट के प्रभारी एवं अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी हिमांशु नौटियाल ने गैर-जमानती वारंट को वापस लेने का आदेश पारित किया।

दिव्यांग उपकरण वितरण योजना से जुड़ा है मामला

यह मामला डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा दिव्यांगजनों को उपकरण वितरण कार्यक्रम में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों से संबंधित है। इस संबंध में 10 जून 2017 को आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) लखनऊ के तत्कालीन निरीक्षक रामशंकर यादव की ओर से कायमगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

जांच के दौरान ट्रस्ट के सचिव अतहर फारूकी सहित परियोजना निदेशक के रूप में लुईस खुर्शीद का नाम भी सामने आया था। इसके बाद मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया लगातार चल रही है।

अनुपस्थिति के चलते जारी हुआ था वारंट

अदालत में सुनवाई के दौरान लुईस खुर्शीद की ओर से दायर डिस्चार्ज (बरी किए जाने) की अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी थी। इसके बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में रिवीजन याचिका दाखिल की गई थी। बचाव पक्ष के अनुसार रिवीजन से संबंधित फाइल ट्रायल कोर्ट में वापस आ जाने की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी, जिसके कारण पिछली निर्धारित तारीख पर लुईस खुर्शीद अदालत में उपस्थित नहीं हो पाईं। इसी अनुपस्थिति को आधार बनाकर अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया था।

हाईकोर्ट की अंतरिम अग्रिम जमानत का दिया गया हवाला

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार चौहान ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 16 दिसंबर 2019 को प्रदान की गई अंतरिम अग्रिम जमानत का हवाला देते हुए अदालत से वारंट निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करती हैं और अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को तैयार हैं।

दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने गैर-जमानती वारंट वापस लेने का आदेश पारित कर दिया, जिससे लुईस खुर्शीद को महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है।

कांग्रेस नेताओं की रही मौजूदगी

सुनवाई के दौरान न्यायालय परिसर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष शकुंतला देवी, नगर अध्यक्ष एवं अधिवक्ता अंकुर मिश्रा सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और समर्थक मौजूद रहे। अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास की जीत बताया।

अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 5 जुलाई को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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