जर्जर भवन का छज्जा भरभराकर गिरा, 65 बच्चों की जान पर मंडरा रहा था खतरा कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज के पास बड़ा हादसा टला |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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कायमगंज/फर्रुखाबाद/

शहर में जर्जर भवनों को लेकर प्रशासनिक दावों की पोल उस समय खुल गई जब कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज की गली में स्थित वर्षों पुराने सियाराम पार वाले भवन का जर्जर छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। गनीमत रही कि घटना के समय कोई व्यक्ति उसकी चपेट में नहीं आया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। छज्जा गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई।

घटना को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर यह जर्जर भवन स्थित है, उसके ठीक पास कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज परिसर में शिव शक्ति अखाड़ा द्वारा ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर संचालित किया जा रहा है। 20 मई से 20 जून तक चल रहे इस शिविर में प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक करीब 65 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छज्जा कार्यक्रम शुरू होने से लगभग आधा घंटा पहले गिरा। यदि यह घटना प्रशिक्षण के दौरान होती तो दर्जनों बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती थी और एक बड़ा हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन लंबे समय से जर्जर हालत में खड़ा था और इसके बारे में कई बार शिकायतें भी की गई थीं।

पहले भी हुई थीं शिकायतें, फिर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि पूर्व जिलाधिकारी द्वारा शहर के जर्जर भवनों की पहचान और जांच के लिए टीम गठित की गई थी। इसके बावजूद खतरनाक स्थिति में खड़े इस भवन को लेकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। अब छज्जा गिरने की घटना के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते भवन को चिन्हित कर सुरक्षित कराया गया होता तो इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों ने आशंका जताई है कि शहर में ऐसे कई अन्य जर्जर भवन मौजूद हैं जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

स्थानीय लोगों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जर्जर भवन को तत्काल सुरक्षित कराया जाए तथा शहर और कस्बों में खतरनाक स्थिति में खड़े अन्य भवनों का भी सर्वे कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय पहले से सतर्कता बरतनी चाहिए।

फिलहाल इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन जिस प्रकार 65 बच्चों की मौजूदगी वाले प्रशिक्षण शिविर के निकट यह हादसा हुआ, उसने प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

अब सवाल यह है कि जब जर्जर भवनों की शिकायतें पहले से थीं और जांच के आदेश भी दिए गए थे, तो आखिर इस भवन को सुरक्षित कराने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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