फर्रुखाबाद।
जनपद के ग्राम अमेठी जदीद में लगभग 500 वर्ष पुराना ऐतिहासिक ताजिया एक बार फिर पूरे शानो-शौकत, अदब और अकीदत के साथ निकाला गया। इस ऐतिहासिक परंपरा के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे पूरा क्षेत्र “या हुसैन” की सदाओं से गूंज उठा।
पारंपरिक मार्ग से कर्बला की ओर रवानगी
यह ऐतिहासिक ताजिया क्षेत्र के जिम्मेदार लोगों और भूतपूर्व प्रधान मुफीद खान, फुरकान खान, असीम, बबलू मंसूरी, वसीम मंसूरी और आमिर सहित तमाम स्थानीय नागरिकों के सामूहिक सहयोग से निकाला गया। जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग ‘गंगा दरवाजा’ से होते हुए कर्बला की ओर रवाना हुआ।
सांप्रदायिक सौहार्द और अटूट आस्था का प्रतीक
अमेठी जदीद का यह 500 साल पुराना ताजिया न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांप्रदायिक सौहार्द और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी एक बड़ा प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में विभिन्न वर्गों के लोग इस ऐतिहासिक और पारंपरिक पल का हिस्सा बनने पहुंचे।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
जुलूस के दौरान शांति, व्यवस्था और अकीदतमंदों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और स्थानीय वॉलिंटियर्स द्वारा सुरक्षा के व्यापक और कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
