सीएचसी कायमगंज में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल, निजी पैथोलॉजी से साठगांठ का आरोप।

By
Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
4 Min Read

कायमगंज/फर्रूखाबाद।

Ad image

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कायमगंज में मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने के बजाय बाहर से दवाएं और जांच कराने के लिए मजबूर किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सतवाड़ा थाना क्षेत्र की करीब 40 वर्षीय प्रीति पत्नी गोविंद ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए उच्चाधिकारियों से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

प्रीति के परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान चिकित्सक द्वारा बाहर की दवाएं लिखी गईं। इसके साथ ही सीबीसी, एमपी, विडाल डब्ल्यू आईएएल सहित अन्य रक्त जांचें बाहर की पैथोलॉजी से कराने के लिए भेजे जाने की बात कही गई है। परिजनों का दावा है कि सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें निजी लैब का रास्ता दिखाया गया।

परिजनों के मुताबिक जांच के लिए एक निजी पैथोलॉजी से जुड़े व्यक्ति द्वारा अस्पताल परिसर में ही रक्त के नमूने लिए गए। आरोप है कि पहली रिपोर्ट में प्लेटलेट्स समेत जांच के आंकड़ों को लेकर गंभीर गड़बड़ी सामने आई। परिजनों ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए दोबारा जांच की मांग की, जिसके बाद कथित तौर पर दोबारा नमूना लिया गया।

परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका आरोप है कि मरीज के इलाज के दौरान महंगी दवाएं बाहर से खरीदने के लिए लिखी गईं, जबकि अस्पताल में सरकारी दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सरकारी अस्पताल में निजी जांच का नमूना लेने पर भी सवाल

सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि अस्पताल में सरकारी जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं तो मरीजों के रक्त के नमूने निजी पैथोलॉजी के लिए क्यों लिए जा रहे हैं? यदि संबंधित पैथोलॉजी के पास आवश्यक पंजीकरण और मान्यता नहीं है, तो अस्पताल परिसर में नमूना संग्रह की अनुमति किस स्तर से मिली—यह भी जांच का विषय है।

प्रीति के परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि जांच रिपोर्ट, चिकित्सकीय पर्चे, बाहर से खरीदी गई दवाओं के बिल और अस्पताल में उपलब्ध सरकारी दवाओं का रिकॉर्ड भी जांचा जाना चाहिए।

सीएमओ और डीएम कराएं जांच, सामने आए सच्चाई

मामले में जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मांग की गई है कि कायमगंज सीएचसी की व्यवस्थाओं की अचानक जांच कराई जाए। अस्पताल में उपलब्ध सरकारी दवाओं का स्टॉक, चिकित्सकों द्वारा लिखे जा रहे पर्चे, निजी पैथोलॉजी को भेजे जा रहे जांच नमूने, संबंधित लैब के पंजीकरण तथा मरीजों से लिए जा रहे शुल्क की जांच कराई जाए।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार चिकित्सक, कर्मचारी अथवा निजी लैब संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से आरोपों की पुष्टि या खंडन के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष लिया जाना भी जरूरी होगा।

सवाल यह है कि सरकारी अस्पताल में इलाज और जांच की सुविधा होने के बावजूद मरीजों को बाहर का रास्ता क्यों दिखाया जा रहा है? जिलाधिकारी और सीएमओ की जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

Subscribe Newsletter

Loading
Share This Article
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *