तेज आंधी बनी काल: निर्माणाधीन मकान की दीवार ढहने से बुजुर्ग की मौत, पत्नी की आंखों के सामने उजड़ गया सहारा |

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नवाबगंज/फर्रुखाबाद/

रात आई तेज आंधी ने नवाबगंज क्षेत्र के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। ग्राम रायपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे एक निर्माणाधीन मकान की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से 65 वर्षीय संतराम राजपूत की मौत हो गई। हादसे के समय उनकी पत्नी विमला देवी भी पास में मौजूद थीं, जो बाल-बाल बच गईं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिवार में कोहराम मच गया।

जानकारी के अनुसार रात करीब नौ बजे संतराम राजपूत अपने घर के अंदर चारपाई पर बैठे हुए थे, जबकि उनकी पत्नी विमला देवी दूसरी चारपाई पर लेटी थीं। इसी दौरान अचानक मौसम ने करवट बदली और तेज आंधी चलने लगी। आंधी का वेग इतना तेज था कि पास में निर्माणाधीन मकान की ऊंची दीवार भरभराकर गिर पड़ी और सीधे संतराम के ऊपर आ गिरी।

दीवार गिरते ही घर में चीख-पुकार मच गई। पति को मलबे में दबा देखकर विमला देवी ने मदद के लिए शोर मचाया। उनकी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे तथा कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे संतराम को बाहर निकाला। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनके शरीर से काफी खून बह रहा था।

घटना की सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस सेवा को बुलाया गया। एम्बुलेंस से उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। लोहिया अस्पताल में भी हालत में सुधार न होने पर चिकित्सकों ने उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज भेजने का निर्णय लिया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

संतराम राजपूत का जीवन संघर्षों से भरा रहा। वह गांव में सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। उनके परिवार में पत्नी विमला देवी, दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। तीनों पुत्रियों का विवाह हो चुका है। बड़ा पुत्र दिनेश विवाहित है, जबकि छोटा पुत्र अनमोल अभी अविवाहित है। परिवार के पास मात्र डेढ़ बीघा कृषि भूमि है, जिससे किसी तरह गुजर-बसर हो पाती है।

बुजुर्ग की मौत की खबर गांव पहुंचते ही शोक का माहौल छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी विमला देवी बार-बार बेसुध हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि संतराम बेहद मेहनती और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे तथा पूरे गांव में उनकी पहचान एक मिलनसार व्यक्ति के रूप में थी।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय सभासद शिवमंगल सिंह गौर मौके पर पहुंचे और उन्होंने तहसील प्रशासन को पूरे मामले से अवगत कराया। सभासद ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी मुआवजा दिलाने की मांग की है। तहसीलदार और राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी घटना की सूचना दे दी गई है, जिससे दैवीय आपदा के तहत पीड़ित परिवार को राहत दिलाई जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि तेज आंधी के दौरान निर्माणाधीन भवनों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सावधानी नहीं बरती जाती, जिसके कारण ऐसे हादसे सामने आते हैं। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।

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