बिहार में CM और डिप्टी CM ही चलायेंगे कुछ समय सरकार

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बिहार में अगले कुछ दिनों तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दो डिप्टी सीएम विजय चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव ही सरकार चलाएंगे। सम्राट कैबिनेट का विस्तार इस महीने होने की संभावना बहुत कम नजर आ रही है।

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में बुधवार को नई सरकार का गठन हुआ। नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को लोकभवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। उनके साथ सिर्फ दो जेडीयू नेताओं विजय एवं बिजेंद्र को ही शपथ दिलाई गई। बाकी मंत्रियों का शपथ ग्रहण कैबिनेट विस्तार करके बाद में किया जाएगा। सम्राट ने सीएम बनते ही अपने और दोनों डिप्टी सीएम के बीच सभी विभागों का बंटवारा भी कर दिया।

बताया जा रहा है कि नई एनडीए सरकार में मंत्री बनने वाले नेताओं को अगले महीने का इंतजार करना पड़ सकता है। जो लोग एक दिन पहले नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट के सदस्य थे, वे भी अब मंत्री नहीं हैं। क्योंकि नीतीश के इस्तीफे के बाद पूरी कैबिनेट भंग कर दी गई थी। अब सम्राट चौधरी की सरकार में नए सिरे से मंंत्रिमंडल का गठन किया जाएगा।

सम्राट कैबिनेट के विस्तार में कुछ दिनों की देरी की वजह पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव बताई जा रही है। माना जा रहा है कि चुनाव होने के बाद ही बिहार में नई सरकार विधिवत रूप से नया स्वरूप लेगी। ऐसे में मई के पहले सप्ताह यानी 4 मई के बाद बिहार में नए मंत्री शपथ ले पाएंगे। तब तक मुख्यमंत्री सम्राट के साथ दो उपमुख्यमंत्री शासन व्यवस्था संभालेंगे।

‘नीतीश सरकार’ से ‘सम्राट सरकार’ के बदलाव में एनडीए के सहयोगी दलों की भूमिका पूर्ववत ही रहेगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि भाजपा बड़े भाई की भूमिका में होगी। हालांकि सरकार में जदयू भले छोटे भाई की भूमिका में होगी, लेकिन अभिभावकत्व तो उसी के नेता नीतीश कुमार का रहेगा।

उधर, लोजपा (रा) के साथ रालोमो और हम (से) का प्रतिनिधित्व भी नई सरकार में रहेगा, यह तय है। हिस्सेदारी का फॉर्मूला भी पहले जैसा ही होगा। अधिक नए चेहरे की संभावना भी कम ही है। हालांकि, एक-आध पुराने चेहरे को नई कैबिनेट में ड्रॉप किया जा सकता है।

सम्राट सरकार के गठन में फॉर्मूला पुराना ही होगा। भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू से अधिक होगी। जदयू और भाजपा के साथ नीतीश सरकार में शामिल अन्य सहयोगी दलों के पूर्व के मंत्री सबसे प्रमुख दावेदार हैं। भाजपा और जदयू में पुराने चेहरे प्रमुख दावेदार हैं। पार्टी का भरोसा इनके ऊपर बना हुआ है।

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