चढ़ावा प्रकरण से उपजे ज्वलंत प्रश्न

By
Web Desk
Web Desk हमारी संपादकीय टीम का आधिकारिक प्रोफ़ाइल है, जो विभिन्न स्रोतों से प्राप्त समाचारों का सत्यापन कर उन्हें पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय रूप...
6 Min Read

दृष्टिकोण :

*चढ़ावा प्रकरण से उपजे ज्वलंत प्रश्न*

(डॉ. सुधाकर आशावादी-विनायक फीचर्स)

चोरी चाहे एक रुपए की हो या करोड़ों रुपए की, दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती है। अयोध्या में भारतीयों की आस्था के प्रतीक श्री राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले में क्या सत्य उद्घाटित होता है तथा किसकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसमें संलिप्तता उजागर होती है, यह तो भविष्य ही बताएगा, किन्तु इतना अवश्य है कि धर्म स्थलों पर चढ़ावे की निगरानी और रखरखाव पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लग गया है। रत्न जड़ित आभूषणों और कीमती उपहारों को सुरक्षित स्थलों पर रखा गया है या वे भी किसी की व्यक्तिगत तिजोरी में बंद हैं, इस सन्दर्भ में भी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरोप प्रत्यारोप के बीच राजनीतिक दल तथा राम मंदिर विरोधी मठ और तथाकथित सुविधाभोगी संत सक्रिय हो गए हैं, जिनके स्वयं के मठों में अकूत धन सम्पदा है, जो साधु का वेश धारण करके भी भौतिक सुखों से विरत नहीं रह पा रहे हैं।

चहुँओर से मंदिर के व्यवस्थापकों को चारित्रिक रूप से लांछित करने का अभियान चलाया जा रहा है। जितने मुँह उतनी बात, लेकिन इस सत्य को कोई नहीं झुठला सकता, कि जिन पर मंदिर चढ़ावे की चोरी का आरोप है, प्राथमिक स्तर पर उनके आर्थिक स्तर में हुए बदलाव को जांच के दायरे में रखा जाना नितांत आवश्यक है। किस प्रभावशाली व्यवस्थापक से किस व्यक्ति के पारिवारिक, रिश्तेदारी या अन्य किस प्रकार के संबंध हैं, इसकी जांच अपेक्षित है ही। कटु एवं व्यावहारिक सत्य यह भी है कि प्रभावशाली लोगों का संरक्षण एवं आशीष पाकर कुछ लोग अपने पद का अनुचित लाभ उठाने में पीछे नहीं रहते।

संभावना यह भी हो सकती है, कि श्री राम मंदिर के चढ़ावा घोटाले में भी कुछ ऐसा ही हुआ हो, लेकिन इसके लिए व्यवस्थापकों को भी क्लीन चिट नहीं दी जा सकती। एसआईटी की अंतरिम जाँच रिपोर्ट के आधार पर मंदिर प्रबंधन समिति के मुख्य कर्ताधर्ताओं के कुछ विश्वासपात्रों और उनके संबंधियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराकर गिरफ़्तारी भी कराई गई है। जिससे स्पष्ट है कि चढ़ावा प्रकरण में दोषी तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। सामान्य समझ से कहा जा सकता है, कि मंदिर की व्यवस्था में लगे लोगों की आर्थिक स्थिति का अध्ययन किया जाना अनिवार्य है कि उनकी आर्थिक संपन्नता में श्री राम मंदिर प्रबंधन एवं व्यवस्था से जुड़ने से पहले और जुड़ने के बाद कितना कितना परिवर्तन हुआ ? उनकी आय के स्रोतों से उनकी आर्थिक संपन्नता कितना मेल खाती है।

अब तस्वीर का दूसरा पहलू भी देखें तो स्पष्ट होगा, कि धर्म आस्था का विषय है। विशेषकर भारत में धर्म के नाम पर दान सभी धर्मों में होता है। केवल राम मंदिर के लिए ही दान नहीं जुटाया जाता, विश्व स्तर पर अपने अपने धर्म का प्रसार करने के लिए विदेशों से चंदा प्राप्त करने का चलन भी किसी से छिपा नहीं है, लेकिन सभी सवाल सनातन धर्म से जुड़े धर्मस्थलों पर ही क्यों खड़े जाते हैं ?

प्रश्न यह भी है, कि वोट बैंक के लिए हिंदुओं को जातियों में बाँटने वाले और विघटन कारी राजनीति करने वाले तथाकथित कुछ राजनीतिक दलों तथा सनातन धर्म को अपनी बपौती मानने वाले मठाधीशों को क्या किसी अन्य धर्म स्थलों में होने वाली इसी प्रकार की दान चोरी, चढ़ावे की चोरी और धन का दुरुपयोग दिखाई नहीं देता ?

प्रश्न यह भी है कि क्या देश के सभी धर्मस्थलों के चढ़ावे और दान चोरी जैसे मुद्दों पर सरकार विशेष जांच दल गठित करके दोषियों को सजा देती है ? क्या दोषियों को सजा देने का दायित्व उस व्यवस्था का नहीं है, जिसके नियंत्रण में सम्बंधित धर्म स्थल है ? यूँ तो किसी भी प्रकार की दान या चढ़ावा चोरी का समर्थन नहीं किया जा सकता, किन्तु क्या यह सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए, कि मंदिर में चढ़ावा चोरी करने वालों की जांच और अपराधियों को दण्डित करने का अधिकार किसके हाथ में सुरक्षित रहना चाहिए। चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर जिस प्रकार से राजनीतिक दलों और सत्ता विरोधी मठों के मठाधीशों द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं, उससे लगता है, कि चढ़ावा चोरी से ऐसे तत्वों को कोई परेशानी नहीं है, इन्हें परेशानी श्री राम के प्रति आस्था रखने वालों तथा सुशासन के चलते इनके राजनीतिक मंसूबे पूरे न होने से परेशानी है।

चढ़ावा चोरी प्रकरण ने ऐसे तत्वों को भारतीयों की आस्था के प्रतीक श्री राम मंदिर के नाम पर सत्ता को बदनाम करने का अवसर दे दिया है। सो आवश्यकता यही है, कि चढ़ावा चोरों को ऐसा सबक मिले, जो उनकी पीढ़ियां याद रखें, लेकिन बिना प्रमाण के आरोप लगाने वाले राम विरोधियों के मठों तथा उन लोगों को भी जांच में रखा जाए, जो बिना सटीक प्रमाणों के व्यवस्था में जुड़े लोगों को लांछित करने में अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वार्थ ढूँढ रहे हैं। *(विनायक फीचर्स)*

Subscribe Newsletter

Loading
TAGGED:
Share This Article
Web Desk हमारी संपादकीय टीम का आधिकारिक प्रोफ़ाइल है, जो विभिन्न स्रोतों से प्राप्त समाचारों का सत्यापन कर उन्हें पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय रूप में पहुंचाने का कार्य करती है। हमारा उद्देश्य ताज़ा और महत्वपूर्ण खबरों को समय पर प्रकाशित कर पाठकों को जागरूक एवं सूचित रखना है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *