रिपोट गोपाल सक्सेना |
अमृतपुर (फर्रुखाबाद) |
लगातार हुई बारिश ने तहसील अमृतपुर परिसर की बदहाल व्यवस्थाओं की एक बार फिर पोल खोल दी। कुछ घंटों की बारिश के बाद ही पूरा परिसर जलभराव और कीचड़ की चपेट में आ गया। मुख्य मार्ग, अधिवक्ताओं के चेंबरों के आसपास, खुला मैदान तथा पैदल आवागमन के रास्तों पर पानी भर जाने से फरियादियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। हर वर्ष बरसात के मौसम में तहसील परिसर की यही तस्वीर देखने को मिलती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण थोड़ी सी बारिश भी पूरे परिसर को दलदल में बदल देती है।
अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर से मांग की है कि तहसील परिसर में शीघ्र इंटरलॉकिंग ईंटें बिछवाई जाएं, प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था कराई जाए, परिसर में उगी झाड़ियों की सफाई कराई जाए तथा जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर हटवाए जाएं। उनका कहना है कि बरसात के दौरान जलभराव के कारण सरकारी कार्य प्रभावित होते हैं और लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विनोद प्रकाश द्विवेदी, महामंत्री गजेंद्र सिंह, प्रभाकर त्रिवेदी, ब्रह्मदत्त शुक्ला, रोशन अवस्थी, अनुराग सिंह, राघवेन्द्र सिंह गोपी, सुदेश कुमार दीक्षित, कमलेश पाण्डेय, गोपाल अवस्थी, शैलेन्द्र यादव, अशोक कुमार सक्सेना, रामनरेश मिश्रा सहित अनेक अधिवक्ताओं ने कहा कि परिसर के खुले मैदान में इंटरलॉकिंग न होने से बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। बरसात में इन झाड़ियों में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है। वहीं चेंबरों के पीछे जमा कूड़ा गंदगी, दुर्गंध और मच्छरों के प्रकोप को बढ़ा रहा है।
वादकारियों ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि तहसील में अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आने वाले लोगों को सबसे पहले बदहाल व्यवस्थाओं से जूझना पड़ता है। फिसलन और जलभराव के कारण कई लोग गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। उनका कहना है कि यदि पूरे परिसर में इंटरलॉकिंग और वैज्ञानिक ढंग से जल निकासी की व्यवस्था कर दी जाए तो वर्षों पुरानी यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
क्षेत्रीय लोगों और अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए तहसील अमृतपुर परिसर में इंटरलॉकिंग, जल निकासी, झाड़ियों की सफाई और नियमित स्वच्छता अभियान को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए, ताकि हर वर्ष दोहराई जाने वाली इस समस्या से स्थायी राहत मिल सके।
