कायमगंज/फर्रुखाबाद।
तहसील सभागार में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. अंकुश लाठर का बेहद सख्त रुख देखने को मिला। जनशिकायतों की समीक्षा के दौरान संतोषजनक जवाब न दे पाने और कार्यों में लापरवाही बरतने के आरोप में डीएम ने एक लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने तथा दूसरे लेखपाल को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी की इस औचक व कड़ी कार्रवाई से राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
कुल 216 शिकायतें दर्ज, मौके पर 15 का निस्तारण
इस समाधान दिवस में कुल 216 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें हमेशा की तरह सबसे ज्यादा मामले जमीन और कानून व्यवस्था से जुड़े रहे। विभिन्न विभागों का विवरण इस प्रकार है:
राजस्व विभाग: 76 शिकायतें (सर्वाधिक)
पुलिस विभाग: 54 शिकायतें
विकास विभाग: 32 शिकायतें
विद्युत विभाग: 28 शिकायतें
अन्य विभाग: 26 शिकायतें
प्राप्त हुई शिकायतों में से 15 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष मामलों को लेकर जिलाधिकारी ने चिंता व्यक्त की और कहा कि राजस्व विभाग में लंबित शिकायतों की संख्या काफी अधिक है। इन मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा, जो 30 जून तक सभी लंबित प्रकरणों का समाधान हर हाल में सुनिश्चित करेगी।
फसल विवाद में लेखपाल निलंबित, दूसरे को प्रतिकूल प्रविष्टि
समीक्षा बैठक के दौरान बालीपुर अटसौनी गांव का एक गंभीर मामला सामने आया। यहां गेहूं की फसल को लेकर दो पक्षों में विवाद चल रहा था। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए एक पक्ष की फसल कटवाकर गौशाला भिजवा दी। जब डीएम डॉ. अंकुश लाठर ने इस संबंध में लेखपाल कप्तान सिंह से जवाब मांगा, तो वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को देखते हुए डीएम ने उन्हें तुरंत निलंबित करने के आदेश दे दिए।
इसके अलावा, राजस्व विभाग की ही एक अन्य शिकायत में लापरवाही बरतने के दोषी पाए जाने पर लेखपाल योगेंद्र सिंह के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि जारी करने के निर्देश दिए गए।

खड़ी फसल काटने और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप, जांच के आदेश
समाधान दिवस में दो अन्य गंभीर शिकायतें भी प्राप्त हुईं जिन पर जिलाधिकारी ने कड़ा संज्ञान लिया:
कमिश्नरी में लंबित मामले के बावजूद काटी फसल: सिकंदरपुर की निवासी तारावती ने आरोप लगाया कि उनका मामला कमिश्नरी में विचाराधीन होने के बाद भी बीती 29 मई को ग्राम प्रधान, कानूनगो और लेखपाल ने मिलकर उनकी खड़ी फसल कटवा दी। इससे उन्हें करीब 20 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
अधिकारी पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का आरोप: गौरक्षक एवं किसान संगठन के पदाधिकारी अवधेश, नेत्रपाल और धनीराम सहित अन्य लोगों ने शिकायत दर्ज कराई कि तहसील के एक अधिकारी ने उनके साथियों को अपने निजी कार्यालय में बुलाकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया।
डीएम ने इन दोनों ही मामलों की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि रिपोर्ट आते ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
“लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी” — डीएम
समाधान दिवस के समापन पर जिलाधिकारी डॉ. अंकुश लाठर ने सभी अधिकारियों को कड़े लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता की शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से भागता हुआ या दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ इससे भी अधिक कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
