शमशाबाद/फर्रुखाबाद।
गंगा नदी के तेज बहाव और कटान से तटीय इलाकों को बचाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने ढाईघाट क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर वहाँ चल रही कटानरोधी परियोजना की प्रगति और काम की गुणवत्ता का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहा कि 15 जून 2026 तक हर हाल में सभी बचे हुए कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कर लिया जाए।
4 करोड़ की लागत से हो रहा है सुरक्षा कार्य
निरीक्षण के दौरान मौजूद अधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत लगभग 4 करोड़ रुपये है। इसका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के कटान से प्रभावित होने वाले तटीय गांवों, किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि और स्थानीय जनसंपत्ति को सुरक्षित करना है।
आधुनिक परकोपाइन पद्धति का इस्तेमाल
परियोजना के तहत ग्राम पैलानी दक्षिण से लेकर ठाईघाट तक गंगा नदी के बाएं तट पर लगभग 1400 मीटर के दायरे में परकोपाइन पद्धति (Porcupine Method) से कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इस तकनीक से हो रहे कार्यों की बारीकी से जांच की |
गुणवत्ता से नहीं होगा कोई समझौता: जिलाधिकारी >
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद तटवर्ती गांवों के लोगों को कटान की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कार्यदायी संस्था को कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि निर्माण कार्य के मानकों और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों को मिलेगी लंबे समय तक सुरक्षा
प्रशासन का मानना है कि मॉनसून आने से पहले इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में हर साल होने वाले बाढ़ और भूमि कटान पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा। इससे न सिर्फ ग्रामीणों के आशियाने सुरक्षित रहेंगे, बल्कि किसानों की उपजाऊ भूमि भी नदी में समाहित होने से बच जाएगी, जिससे स्थानीय लोगों को लंबे समय तक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
