कायमगंज/फर्रुखाबाद।
गणपति बप्पा मोरया… मंगल मूर्ति मोरया के जयकारों से गुरुवार को लोहे वाली गोदाम क्षेत्र गूंज उठा। गणपति महोत्सव के अंतिम दिन सुबह से ही पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे आस्था का रंग भी गहराता गया। ढोल-नगाड़ों की थाप, भजनों की मधुर स्वर-लहरियां और गणपति महाराज के जयकारों ने पूरे इलाके को भक्तिमय बना दिया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से हवन-पूजन हुआ और इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें देर रात तक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
गणपति महोत्सव के अंतिम दिन आयोजन स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने गणपति महाराज के दर्शन कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। शाम होते-होते पूजा स्थल पर भीड़ बढ़ती चली गई और पूरा क्षेत्र गणपति भक्ति के रंग में रंग गया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ गजानन महाराज का पूजन
पंडित शलेंद्र कुमार दीक्षित ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। गणपति महाराज को पुष्प, फल, मिष्ठान और विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति, व्यापार में उन्नति और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।

गजानन महाराज को हिंदू धर्म में विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण करने की परंपरा है। मान्यता है कि प्रथम पूज्य गणेश की आराधना से कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और शुभता का मार्ग प्रशस्त होता है। गणपति का स्वरूप भी अपने आप में विशेष संदेश देता है—बड़ा मस्तक विवेक और ज्ञान का, बड़े कान ध्यान से सुनने का और उनका शांत स्वरूप धैर्य व संतुलन का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि गणेश महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व भी माना जाता है।
गणपति महाराज के चरणों में नगर अध्यक्ष व्यापार मंडल अमित सेठ की ओर से श्रद्धा और भक्ति के साथ छप्पन भोग अर्पित किया गया। विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से सजे कचौड़ी और पनीर की सब्जी आकर्षक ढंग से सजाया गया। विधि-विधान से पूजा के बाद भगवान गणेश को भोग लगाया गया।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने गणपति महाराज से परिवार में सुख-समृद्धि, व्यापार में तरक्की और पूरे क्षेत्र में खुशहाली की प्रार्थना की। छप्पन भोग के दर्शन के लिए भी लोगों में उत्साह नजर आया।
भजनों की धुन पर झूमे भक्त, जयकारों से गूंजता रहा पंडाल
शाम करीब 6:30 बजे से भजन-कीर्तन का दौर शुरू हुआ। भजनों की स्वर-लहरियां गूंजते ही श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। महिलाएं, बच्चे और युवा तालियों की थाप पर भक्ति गीतों के साथ झूमते नजर आए। बीच-बीच में गणपति बप्पा मोरया के जयकारे वातावरण में नई ऊर्जा भर देते रहे।
पूजा स्थल पर देर रात तक श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। कई भक्तों ने गणपति महाराज के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर परिवार की मंगलकामना की।
कचौड़ी-पनीर की सब्जी से सजी भंडारे की सेवा
गणपति महोत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। मुढ़ी हवाई ने कचौड़ी और पनीर की सब्जी तैयार कर गणपति महाराज की सेवा में अपनी सहभागिता निभाई। शाम चार बजे शुरू हुआ भंडारा देर रात 12 बजे तक चलता रहा।
भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सेवा में जुटे लोगों ने श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित किया। देर रात तक भंडारे में लोगों की भीड़ बनी रही। आयोजन स्थल पर एक ओर भक्ति और पूजा चल रही थी तो दूसरी ओर श्रद्धालुओं की सेवा में लोग पूरी निष्ठा से जुटे रहे।
हवन की आहुतियों से गूंजा वातावरण
गणपति उत्सव के अंतिम दिन हवन-पूजन भी कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कीं। वातावरण में गूंजते मंत्रों और हवन की सुगंध ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से परिवार के सदस्यों के लिए सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की। हवन की पूर्णाहुति के साथ गणपति महोत्सव के धार्मिक कार्यक्रमों का विधिवत समापन हुआ।
आरती के समय उमड़ा आस्था का सैलाब
आरती शुरू होते ही पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ गई। हाथों में आरती की थाल और जुबां पर गणपति महाराज के जयकारों के साथ भक्तों ने पूरे श्रद्धाभाव से आरती में हिस्सा लिया। वातावरण में घंटियों की आवाज और जयकारों की गूंज सुनाई देती रही।
विनोद सक्सेना, आयुष गुप्ता, देव गुप्ता, लाविक गुप्ता और सीताराम सक्सेना सहित अन्य श्रद्धालुओं ने आरती में सहभागिता की। वहीं विनीत सेठ, समर्थ सेठ और रोहित अग्रवाल ने भी गणपति महाराज की आरती उतारकर आशीर्वाद लिया।
गणपति के दरबार में दिखा एकता और सेवा का संगम
पूरे आयोजन के दौरान लोहे वाली गोदाम क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। बच्चे पूजा सामग्री लेकर पहुंचे तो महिलाएं भजन-कीर्तन में शामिल रहीं। युवाओं ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया और श्रद्धालुओं की सेवा में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
गणपति महोत्सव ने क्षेत्र के लोगों को एक मंच पर लाने का काम किया। पूजा से लेकर भंडारे तक हर व्यवस्था में लोगों की सामूहिक भागीदारी नजर आई। श्रद्धालुओं का कहना था कि गणपति महाराज की आराधना मन को शांति देती है और विघ्नहर्ता के दरबार में सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
अंतिम दिन भी देर रात तक बना रहा भक्तिमय माहौल
गणपति महोत्सव के अंतिम दिन सुबह शुरू हुआ धार्मिक उल्लास देर रात तक दिखाई दिया। हवन की पवित्र आहुतियों से लेकर छप्पन भोग, भजन-कीर्तन, आरती और विशाल भंडारे तक पूरा आयोजन श्रद्धा और सेवा से सराबोर रहा।
लोहे वाली गोदाम क्षेत्र में देर रात तक गणपति बप्पा मोरया के जयकारे सुनाई देते रहे। श्रद्धालुओं ने गजानन महाराज के चरणों में अपनी मनोकामनाएं अर्पित कीं और परिवार, व्यापार तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। भक्ति, सेवा और प्रसाद से सजा गणपति महोत्सव का अंतिम दिन श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया।
कार्यक्रम में नगर अध्यक्ष व्यापार मंडल अमित सेठ, शोभित रस्तोगी, पुनीत रस्तोगी, मोहित गर्ग, पायल सेठ, अनुभ रस्तोगी, पारुल रस्तोगी, रुचि गुप्ता, रिषभ सेठ, परी सेठ, अमित पालीवाल, विनीत सेठ, राहुल वर्मा, प्रवाल शर्मा, उमंग सेठ, अभिषेक गुप्ता मीडिया प्रभारी, राजीव सेठ, विभु सेठ, कालू शर्मा, हैप्पी शर्मा, नानू शर्मा, बबलू ट्रेलर, महेंद्र, विकास सेठ, आलोक, सीताराम सक्सेना, विनोद सक्सेना, चंदन सक्सेना, समर्थ सेठ, सार्थक सेठ, दीपाली सेठ, छाया सेठ, माया सेठ, सुचिता सेठ और सृष्टि सेठ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

