राजेपुर/फर्रुखाबाद/
जिले में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि जिले के 33 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। सबसे अधिक असर अमृतपुर तहसील क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां कई गांवों का संपर्क टूटने लगा है और लोगों के घरों तक पानी पहुंच चुका है। ऐसे हालात में प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज करते हुए राजेपुर क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत शरणालय शुरू कर दिया है।
राजेपुर से जमापुर जाने वाले मार्ग पर चित्रकूट डिप के पास स्थित एक फार्मेसी कॉलेज भवन को अस्थायी राहत शिविर में तब्दील किया गया है। यहां बाढ़ प्रभावित परिवार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए अपने जरूरी सामान, मवेशियों और बच्चों के साथ पहुंच रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि किसी भी परिवार को खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।
राहत शरणालय में करीब 80 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। कमरों में गद्दे बिछाए गए हैं और बिजली व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए जल्द ही जनरेटर भी लगाया जाएगा। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग रहने की व्यवस्था के साथ अलग शौचालय भी बनाए गए हैं। शिविर में सुबह-शाम भोजन, पीने का स्वच्छ पानी, आवश्यक दवाइयों और प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पूरे राहत शिविर की निगरानी क्षेत्रीय लेखपाल सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी लगातार कर रहे हैं।
चित्रकूट गांव के निवासी महेश ने बताया कि उनका गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर चुका है। प्रशासन की सलाह पर उन्होंने अपने परिवार, जरूरी घरेलू सामान और बकरियों के साथ राहत शरणालय में शरण ली है। उनका कहना है कि यहां उन्हें सुरक्षित माहौल और आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं।
वहीं अंबरपुर ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि जयवीर राजपूत ने बताया कि लगभग दो हजार की आबादी वाले उनके गांव में करीब 40 घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार राहत सामग्री पहुंचा रहा है और जरूरतमंद परिवारों की हरसंभव सहायता की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रभावित गांवों में राहत और बचाव दल सक्रिय हैं तथा जरूरत पड़ने पर अन्य सुरक्षित स्थानों पर भी शरणालय खोले जाएंगे। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचें।
बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच प्रशासन की यह पहल प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। अब उम्मीद है कि समय रहते राहत और बचाव कार्यों के जरिए लोगों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
