किताबों की अनोखी दुनिया

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किताबों की अनोखी दुनिया

लेखिका-इनाया यादव, कक्षा-तीसरी, बाल भारती पब्लिक स्कूल,सीपत (बिलासपुर )

मेरी कल्पना की दुनिया बहुत सुंदर और रंगीन है। एक दिन मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे स्कूल बैग में रखी किताबें आपस में धीमी-धीमी बातें कर रही हों। मैं ध्यान से सुनने लगी कि वे क्या कह रही हैं।अंग्रेज़ी की किताब अपने रोचक कहानियों और रंग-बिरंगे चित्रों पर गर्व कर रही थी। तभी आर्ट की किताब ने मुस्कुराते हुए कहा कि इन चित्रों में सुंदर रंग वही भरती है। ईवीएस की किताब ने बताया कि वह मुझे हमारे आसपास की दुनिया और स्वस्थ जीवन के बारे में सिखाती है। गणित की किताब ने गर्व से कहा कि वह मुझे समस्याएँ हल करना और समय का सही उपयोग करना सिखाती है।

अंत में हिंदी की किताब ने प्रेम से कहा कि वह मुझे अपनी भाषा, सुंदर कहानियों और अच्छे संस्कारों से जोड़ती है, जिससे मैं अपने मन की बात अच्छे से व्यक्त कर पाती हूँ।।तब मुझे समझ आया कि मेरी सभी किताबें मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और हर एक मुझे कुछ न कुछ नया सिखाती है।

*सीख: हमारी कल्पना असीम होती है। हमें हर विषय का सम्मान करना चाहिए और सीखने की इस सुंदर दुनिया को खुशी-खुशी अपनाना चाहिए।*

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