फर्रुखाबाद/
नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद की आवारा कुत्तों की नसबंदी मुहिम अब सवालों के घेरे में आ गई है। इस मामले में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गंभीर आरोप लगाए हैं कि नसबंदी के नाम पर शहर और गांवों से उठाए गए हजारों कुत्तों को वापस उनके स्थानों पर नहीं छोड़ा गया, जिससे उनकी स्थिति संदिग्ध बनी हुई है।
प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि नगर पालिका द्वारा आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर जारी किया गया था। इसके तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 3000 बेसहारा कुत्तों को पकड़ा गया। आरोप है कि नसबंदी के बाद नियमानुसार उन्हें उसी स्थान पर छोड़ा जाना चाहिए था, जहां से उन्हें पकड़ा गया था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इस संबंध में 19 मई 2026 को भी जिला प्रशासन को सूचना दी गई थी, जिस पर कार्रवाई का आश्वासन मिला था। लेकिन लगभग 10 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और न ही जानवरों की स्थिति स्पष्ट की गई।
प्रार्थना पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो इस मुद्दे को मुख्यमंत्री तक उठाया जाएगा। साथ ही पूरे मामले की जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर होने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर बेसहारा जानवरों को सुरक्षित रूप से उनके स्थानों तक पहुंचाया जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
