मथुरा/गोवर्धन।
जहां भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण सामान्य लोग कुछ कदम चलने से भी बच रहे हैं, वहीं फर्रुखाबाद से पहुंचे एक दिव्यांग श्रद्धालु ने अपनी अटूट आस्था, अदम्य साहस और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया।
दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद यह श्रद्धालु गोवर्धन महाराज की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करने निकल पड़ा। तपती सड़कें, सिर पर बरसती आग जैसी धूप और लगातार बढ़ता तापमान भी उसके कदमों को रोक नहीं सका। श्रद्धा और विश्वास के बल पर वह निरंतर आगे बढ़ता रहा।
परिक्रमा मार्ग पर मौजूद श्रद्धालु और स्थानीय लोग जब इस दिव्यांग युवक को देख रहे थे तो उनके मन में सम्मान और भावुकता दोनों के भाव उमड़ पड़े। कई लोगों ने उसकी हौसला अफजाई की और कहा कि भगवान श्रीकृष्ण तथा गिरिराज महाराज की विशेष कृपा जिसके ऊपर होती है, वही ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी परिक्रमा का संकल्प पूरा करने का साहस जुटा पाता है।
युवक की आस्था देखकर अनेक श्रद्धालुओं ने उसे प्रणाम किया और उसके जज्बे की सराहना की। लोगों का कहना था कि शारीरिक कमजोरी इंसान को कमजोर नहीं बनाती, बल्कि मजबूत इरादे और दृढ़ विश्वास ही उसे असाधारण बनाते हैं। इस दिव्यांग श्रद्धालु ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में श्रद्धा हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
गोवर्धन परिक्रमा को सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु गिरिराज महाराज की परिक्रमा करने पहुंचते हैं, लेकिन इस भीषण गर्मी में दोनों पैरों से दिव्यांग होकर 21 किलोमीटर की परिक्रमा करना अपने आप में एक प्रेरणादायक मिसाल है।
यह दृश्य देखने वाले लोगों का कहना था कि आज के समय में जब छोटी-छोटी कठिनाइयों के सामने लोग हार मान लेते हैं, तब इस युवक की अटूट श्रद्धा और दृढ़ संकल्प समाज को यह संदेश देता है कि सच्ची आस्था के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है।
फर्रुखाबाद के इस श्रद्धालु ने अपने साहस, विश्वास और भक्ति से न केवल गोवर्धन परिक्रमा पूरी करने का संकल्प लिया, बल्कि हजारों लोगों को जीवन में संघर्षों से लड़ने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा भी दे दी।
