कायमगंज सीएचसी में हड़कंप: मासूम की चांदी की पायल चुराते महिला रंगे हाथ गिरफ्तार, भीड़ ने पुलिस को सौंपा |

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रिपोर्ट सुधीर सिंह |

कायमगंज/फर्रुखाबाद:

₹2 का लालच देकर बच्ची के पैर से उतारी चांदी की पायल, भीड़ ने घेरकर पुलिस को सौंपा |

खबर मत चलाओ, वीडियो मत बनाओ — चौकी प्रभारी की कथित नाराजगी भी बनी चर्चा का विषय

कायमगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब इलाज कराने आई एक मासूम बच्ची की चांदी की पायल चोरी करने की कोशिश का मामला सामने आया। अस्पताल में मौजूद लोगों की सतर्कता से आरोपी महिला को मौके पर ही पकड़ लिया गया और पुलिस के हवाले कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक अलीगंज थाना क्षेत्र के गांव विजयदेपुर निवासी मीनू पत्नी सत्यम अपनी करीब एक वर्षीय बेटी को इलाज के लिए सीएचसी लेकर आई थीं। महिला डॉक्टर को दिखाने के बाद वह दवा लेने के लिए पर्चा काउंटर पर लाइन में लगी थीं। इसी दौरान अस्पताल में काफी भीड़ थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ का फायदा उठाकर एक संदिग्ध महिला बच्ची के पास पहुंची और उसे बहलाने के लिए ₹2 का सिक्का दे दिया। आरोप है कि इसी दौरान महिला ने बड़ी चालाकी से बच्ची के पैर से चांदी की पायल उतार ली और वहां से निकलने लगी।

कुछ देर बाद जब मां की नजर बच्ची के पैर पर पड़ी तो एक पायल गायब थी। यह देख वह घबरा गईं और शोर मचा दिया। शोर सुनते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और मौजूद लोगों ने संदिग्ध महिला की तलाश शुरू कर दी।

बताया जा रहा है कि लोगों को शक होने पर अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर मौजूद महिला को पकड़ लिया गया। तलाशी लेने पर उसके पास से बच्ची की चोरी हुई पायल बरामद हो गई। इसके बाद लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

सूचना मिलने पर चौकी प्रभारी अंकुर भाटी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

घटना के दौरान एक और मामला चर्चा में रहा। मौके पर मौजूद कुछ लोगों का आरोप है कि चौकी प्रभारी ने मीडिया कर्मियों से खबर न चलाने और वीडियो न बनाने की बात कही, जिससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। हालांकि पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

इस घटना ने सीएचसी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि इलाज के लिए आने वाले मरीज और उनके परिजन आखिर अस्पताल परिसर में कितने सुरक्षित हैं?

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