समाधान दिवस में प्रोटोकॉल की अनदेखी: डीएम की मौजूदगी में बिना कैप दिखे पुलिसकर्मी, अनुशासन पर उठे सवाल |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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कायमगंज/फर्रुखाबाद |

तहसील सभागार में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पुलिस विभाग के अनुशासन और वर्दी के प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए। जनसुनवाई की अध्यक्षता कर रहे जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की मौजूदगी में एक पुलिसकर्मी बिना निर्धारित कैप (टोपी) के ड्यूटी करता दिखाई दिया। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और फरियादियों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना रहा।

संपूर्ण समाधान दिवस शासन की प्राथमिकताओं में शामिल महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जाता है, जहां जिलाधिकारी स्वयं आम जनता की शिकायतें सुनते हैं और अधिकारियों को उनके त्वरित निस्तारण के निर्देश देते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में प्रशासनिक व्यवस्था, अनुशासन और वर्दी के नियमों का पालन विशेष रूप से अपेक्षित होता है। इसके बावजूद पुलिस विभाग के एक सिपाही का बिना कैप ड्यूटी करना कई सवाल छोड़ गया।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के साथ उपजिलाधिकारी अभिषेक वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक गिरीश कुमार, क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार द्विवेदी, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विनोद शुक्ला सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौजूद थे। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात अधिकांश पुलिसकर्मी पूरी निर्धारित वर्दी और कैप के साथ मुस्तैद दिखाई दिए, लेकिन कोतवाली कायमगंज में तैनात सिपाही अभिषेक कुमार बिना कैप के ही ड्यूटी करते नजर आए।

पुलिस विभाग की वर्दी केवल पहचान का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन और गरिमा का भी प्रतीक मानी जाती है। पुलिस नियमों के अनुसार ड्यूटी के दौरान निर्धारित वर्दी के सभी अंगों का पालन किया जाना आवश्यक होता है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में वर्दी के प्रोटोकॉल की अनदेखी होना विभागीय अनुशासन पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

हालांकि, समाधान दिवस के दौरान अधिकारी जनसुनवाई और शिकायतों के निस्तारण में व्यस्त रहे, जिसके चलते इस ओर तत्काल किसी का ध्यान नहीं गया। लेकिन कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस लापरवाही को लेकर आपस में चर्चा की और सवाल उठाया कि यदि उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में ही वर्दी के नियमों का पालन नहीं हो रहा है, तो सामान्य परिस्थितियों में अनुशासन की स्थिति कैसी होगी।

अब यह देखना होगा कि पुलिस विभाग इस मामले को केवल एक सामान्य चूक मानकर नजरअंदाज करता है या फिर वर्दी के अनुशासन को बनाए रखने के लिए संबंधित पुलिसकर्मी से स्पष्टीकरण लेकर आवश्यक विभागीय कार्रवाई करता है। प्रशासनिक बैठकों और जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में वर्दी के नियमों का पालन विभाग की कार्यशैली और अनुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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