कालिंदी का रूट बदला तो उबलेगा फर्रुखाबाद: विकास मंच की रेलवे को दो-टूक, बड़े आन्दोलन की चेतावनी |

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फर्रुखाबाद/

जनपद की सबसे अहम ट्रेन मानी जाने वाली कालिंदी एक्सप्रेस के संभावित रूट परिवर्तन की खबर ने फर्रुखाबाद समेत आसपास के जिलों में नाराजगी बढ़ा दी है। बुधवार को इस मुद्दे पर फर्रुखाबाद विकास मंच ने रेलवे स्टेशन पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और रेल मंत्री के नाम स्टेशन मास्टर को ज्ञापन सौंपते हुए साफ चेतावनी दी कि यदि ट्रेन का रूट बदला गया तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।

40 साल पुरानी ट्रेन पर संकट

विकास मंच के जिलाध्यक्ष भईयन मिश्रा के नेतृत्व में पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ट्रेन संख्या 14118/14117 भिवानी-प्रयागराज-भिवानी कालिंदी एक्सप्रेस पिछले करीब चार दशकों से फर्रुखाबाद को नई दिल्ली से जोड़ने का काम कर रही है। यह ट्रेन जिले के लोगों के लिए सिर्फ एक रेल सेवा नहीं बल्कि राजधानी तक पहुंचने की सबसे बड़ी जीवनरेखा है।

हाल ही में इस ट्रेन का विस्तार कानपुर के रास्ते प्रयागराज तक किया गया था, लेकिन अब सूचना मिल रही है कि कानपुर अनवरगंज से मंधना तक प्रस्तावित एलिवेटेड ट्रैक निर्माण के चलते रेलवे इसे फर्रुखाबाद की बजाय शिकोहाबाद-इटावा रूट से चलाने की तैयारी कर रहा है।

“फर्रुखाबाद से दिल्ली का एकमात्र सहारा”

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रयागराज और कानपुर जैसे शहरों के लिए दिल्ली जाने को कई ट्रेनें उपलब्ध हैं, लेकिन फर्रुखाबाद, कन्नौज, हरदोई और मैनपुरी के हजारों यात्रियों के लिए कालिंदी एक्सप्रेस ही सबसे बड़ा सहारा है।

हर दिन छात्र, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और मरीज इसी ट्रेन के जरिए दिल्ली की यात्रा करते हैं। ऐसे में रूट बदलना लाखों लोगों की परेशानी बढ़ा देगा।

रेलवे को अल्टीमेटम

विकास मंच ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि कालिंदी एक्सप्रेस को किसी भी कीमत पर फर्रुखाबाद से हटाकर दूसरे रूट पर न भेजा जाए। संगठन ने साफ कहा कि अगर जनता की आवाज नहीं सुनी गई तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी।

प्रदर्शन में ये लोग रहे शामिल

इस दौरान निश्चित दुबे, कोमल पांडेय, रांची पाल, ओम निवास पाठक, बाबू अग्निहोत्री, नितिन गुप्ता, मलखान सिंह राजपूत, रजत वर्मा और राजीव वर्मा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

फर्रुखाबाद की रेल कनेक्टिविटी पर मंडराते इस खतरे ने अब राजनीतिक और सामाजिक रूप लेना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्म हो सकता है।

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