रिपोर्ट गोपाल सक्सेना |
अमृतपुर/फर्रुखाबाद।
उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर विद्युत आपूर्ति के दावे कर रही है, लेकिन अमृतपुर विद्युत उपखंड के चपरा फीडर से जुड़े ग्राम समेचीपुर चितार के ग्रामीण पिछले करीब एक वर्ष से अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले वर्ष आई बाढ़ के दौरान गांव में बिजली के कई खंभे गिर गए थे, जिसके बाद से विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप है। कई बार शिकायतें और प्रार्थना पत्र देने के बावजूद अब तक न तो क्षतिग्रस्त खंभे बदले गए और न ही बिजली बहाल हो सकी।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न होने से सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ा है। ट्यूबवेल बंद होने से फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है और खेत सूखने लगे हैं। वहीं छात्रों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है, क्योंकि शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। पेयजल की व्यवस्था भी प्रभावित है और लोग हैंडपंपों पर निर्भर हैं। रात के समय महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को आवागमन में परेशानी होती है, जबकि सांप-बिच्छुओं और चोरी जैसी घटनाओं का भी भय बना रहता है।
ग्रामीणों का छलका दर्द
ग्रामीण बोले- सिंचाई, पढ़ाई और पेयजल सब प्रभावित, जल्द आपूर्ति बहाल न हुई तो होगा आंदोलन
ग्रामीण सलीम ने बताया कि पिछले एक वर्ष से गांव में बिजली नहीं है। सिंचाई के अभाव में किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों में विकास के दावे करती है, लेकिन उनका गांव आज भी लालटेन और मोबाइल की टॉर्च के सहारे रातें काटने को विवश है।
वहीं पप्पू का कहना है कि अंधेरा होते ही गांव में निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही टूटे हुए बिजली के खंभे बदलकर विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और बिजली विभाग की होगी।
बिजली विभाग ने रखी अपनी बात
मामले में एसडीओ विद्युत विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि गांव में कुल 43 बिजली कनेक्शन हैं, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2017 से अब तक किसी भी उपभोक्ता द्वारा बिजली बिल का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशों के अनुसार क्षतिग्रस्त विद्युत लाइन को एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि एसडीओ ने स्पष्ट किया कि लाइन ठीक होने के बाद नियमित विद्युत आपूर्ति तभी शुरू की जाएगी, जब उपभोक्ता अपने बकाया बिजली बिल का भुगतान करेंगे।
इस मामले में जहां ग्रामीण लंबे समय से बिजली न मिलने से परेशान हैं, वहीं विभाग बकाया बिलों को आपूर्ति बहाल करने में प्रमुख बाधा बता रहा है। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पहले बिजली बहाल होती है या बकाया बिलों का समाधान निकलता है।
