रिपोर्ट सौरभ दीक्षित |
फर्रुखाबाद |

जनपद फर्रुखाबाद के तहसील सदर अंतर्गत पंखियों की मढ़ैया, दिलीप की मढ़ैया, कटरी भीमपुर सहित कई गाँवों को गंगा के कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा 7 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पार्कूपाइन, जियो बैग और स्टड लगाने का कार्य स्वीकृत हुआ था। लेकिन ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत और भ्रष्टाचार के कारण यह पूरी योजना गंगा नदी के बहाव में बह गई, जिससे अब दर्जनों गाँवों पर कटान का भीषण खतरा मंडरा रहा है।
विरोध करने पर ग्रामीणों को दी जेल भेजने की धमकी
स्थानीय ग्रामीणों—राजीव वर्मा, रामू राजपूत, राम लखन वर्मा, पंकज राठौर और सत्यनारायण शाक्य—ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि ठेकेदार ने शुरुआत से ही काम में भारी धांधली की। जब भी ग्रामीणों ने सही गुणवत्ता से काम करने का अनुरोध किया, तो ठेकेदार और अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाया। ग्रामीणों को “सरकारी काम में बाधा डालने” के नाम पर झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकियाँ दी गईं।
ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार के लोगों ने दबंगई दिखाते हुए कहा, “केवल एक बार पानी आ जाए, हमारा काम खत्म। भाड़ में जाए, तुम्हें जो करना है कर लो, हमारा कुछ नहीं बिगड़ने वाला।” इस डर से ग्रामीण लंबे समय तक चुप रहने को मजबूर रहे।
जियो बैग की जगह सीमेंट की बोरियों में भरा गया रेता
दिखावे के लिए किए गए इस काम की पोल गंगा नदी का जलस्तर जरा सा बढ़ते ही खुल गई। आरोप है कि घटिया निर्माण के तहत असली जियो बैग की जगह सामान्य सीमेंट की बोरियों में रेता भरकर लगाया गया था, जबकि केवल ऊपर दिखाने के लिए कुछ जियो बैग रखे गए थे। नदी का मामूली बहाव आते ही यह सब गंगा जी में समा गया और अब ग्रामीणों के घर सीधे कटान की ज़द में आ गए हैं।
चोरी छिपाने के लिए काटे गए हरे शीशम के पेड़
गंगा के कटान को रोकने में नाकाम रहने और अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए ठेकेदार के लोगों ने वन विभाग और प्रशासन की अनुमति के बिना ही गौशाला की जमीन पर खड़े प्रतिबंधित हरे शीशम के पेड़ों को धड़ल्ले से काट डाला। ट्रैक्टरों में भरकर लाई गई शीशम की डालियों को बोरियों और स्टड के आगे डाला गया, लेकिन गंगा की लहरों के आगे यह तिकड़म भी काम न आई।
फर्रुखाबाद विकास मंच ने संभाला मोर्चा, आंदोलन की चेतावनी
घटना की जानकारी मिलते ही फर्रुखाबाद विकास मंच के जिलाध्यक्ष भईयन मिश्रा मौके पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने भयभीत ग्रामीणों से बात की और सिंचाई विभाग के कार्यों की कड़े शब्दों में निंदा की।
भईयन मिश्रा ने कहा 7 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों ने मिलकर पूरी तरह बंदरबांट कर लिया है। इस भ्रष्टाचार के कारण आज निर्दोष ग्रामीणों के घर-मकान नदी में समाने की कगार पर हैं। बिना परमिशन के हरे शीशम के पेड़ों का काटना भी एक गंभीर अपराध है। वन विभाग को इस पर तत्काल मुकदमा दर्ज करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्रुखाबाद विकास मंच का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही जिलाधिकारी (DM) फर्रुखाबाद से मिलकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करेगा। यदि दोषी ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो मंच के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।
