पांचाल घाट गंगा पुल पर बढ़ा खतरा, खुले ज्वाइंट्स पर देर रात बैरिकेडिंग 50 साल पुराने पुल की हालत जर्जर, हादसे की आशंका के बीच शुरू हुई मरम्मत |

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फर्रुखाबाद/

फर्रुखाबाद जनपद में मंगलवार को इटावा-बरेली नेशनल हाईवे (730C) पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कादरी गेट थाना क्षेत्र स्थित पांचाल घाट गंगा पुल पर अचानक हुए मरम्मत कार्य और अव्यवस्थित बैरिकेडिंग के चलते करीब 3 किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया। तपती धूप और भीषण गर्मी के बीच हजारों वाहन घंटों तक सड़क पर रेंगते रहे। हालात इतने खराब हो गए कि बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, स्कूली छात्र, शिक्षक और दूर-दराज से गुजर रहे ट्रक चालक करीब तीन घंटे तक जाम में फंसे तड़पते रहे।

आधी रात को शुरू हुआ काम, सुबह बन गया संकट

जानकारी के मुताबिक, सोमवार देर रात पांचाल घाट पुल के तीन अलग-अलग हिस्सों में मरम्मत कार्य शुरू किया गया। कार्यस्थल को घेरने के लिए पुल पर भारी लोहे के एंगल और बैरिकेडिंग लगा दी गई, जिससे पुल का एक बड़ा हिस्सा संकरा हो गया। शुरुआत में देर रात और तड़के कम यातायात होने के कारण वाहन किसी तरह निकलते रहे, लेकिन सुबह होते ही हाईवे पर वाहनों का दबाव तेजी से बढ़ गया।

देखते ही देखते जमापुर क्षेत्र से लेकर हाईवे तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। ट्रकों, बसों, कारों और बाइक सवारों की लाइन कई किलोमीटर तक फैल गई। जाम में फंसे लोगों को पीने के पानी तक के लिए परेशान होना पड़ा।

स्कूली बच्चे, महिलाएं और मरीज भी जाम में फंसे

इस अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों और छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहे परिवारों पर पड़ा। कई स्कूल बसें घंटों जाम में फंसी रहीं। मरीजों को लेकर जा रहे वाहन भी आगे नहीं बढ़ सके। गर्मी और उमस के कारण बच्चों और बुजुर्गों की हालत बिगड़ती नजर आई।

जाम में फंसे चेन्नई से रुद्रपुर जा रहे ट्रक चालक हम्दा खान ने नाराजगी जताते हुए कहा—

तीन घंटे से गाड़ी एक इंच नहीं बढ़ी। इतनी गर्मी में पानी तक नहीं मिल रहा। अगर पहले से जानकारी होती तो दूसरा रास्ता पकड़ लेते।”

वहीं महाराष्ट्र से उत्तराखंड जा रहे ट्रक चालक अनिल कुमार ने कहा कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के हाईवे पर इस तरह काम शुरू करना यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

आगे निकलने की होड़ में कई जगह विवाद

जाम बढ़ने के साथ ही वाहन चालकों का धैर्य जवाब देने लगा। कई जगहों पर ओवरटेक करने की कोशिश में वाहन आमने-सामने फंस गए, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। कुछ स्थानों पर वाहन चालकों के बीच तीखी बहस और कहासुनी भी हुई। सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

स्थानीय लोगों ने NHAI और प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। लोगों का कहना है कि पांचाल घाट पुल पर जाम अब आम समस्या बन चुकी है। हर कुछ दिनों में यहां घंटों लंबा जाम लगता है, लेकिन स्थायी समाधान के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुल की हालत लंबे समय से खराब है, लेकिन मरम्मत कार्य भी बिना किसी ठोस ट्रैफिक प्लानिंग के किया जाता है। लोगों ने कहा कि अगर पहले से डायवर्जन प्लान बनाया जाता और पर्याप्त पुलिस बल लगाया जाता, तो हजारों लोगों को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।

शुरुआत में सिर्फ तीन पुलिसकर्मी संभालते रहे व्यवस्था

हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े जाम को नियंत्रित करने के लिए शुरुआत में मौके पर केवल तीन पुलिसकर्मी मौजूद थे। जैसे-जैसे हालात बिगड़ते गए, बाद में अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद ट्रैफिक धीरे-धीरे सामान्य हो सका।

ट्रैफिक प्रभारी ने NHAI को ठहराया जिम्मेदार

मामले पर यातायात प्रभारी सत्येंद्र सिंह ने बताया कि जाम की सूचना मिलते ही पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया और ट्रैफिक को सुचारू करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कह

NHAI द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना और ट्रैफिक डायवर्जन प्लान के अचानक लोहे के एंगल लगाकर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। इसी वजह से पुल पर भारी जाम की स्थिति बनी।”

उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह के कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभाग को ट्रैफिक पुलिस को सूचना देनी चाहिए, ताकि वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके।

सवालों के घेरे में NHAI की कार्यशैली

इस पूरे घटनाक्रम ने NHAI की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना पूर्व सूचना, बिना डायवर्जन और बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के हाईवे पर मरम्मत कार्य शुरू करना हजारों यात्रियों के लिए भारी परेशानी का कारण बन गया। भीषण गर्मी में घंटों जाम में फंसे लोगों ने प्रशासन और NHAI के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया है।

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