फर्रुखाबाद।
जनपद का एक प्रतिष्ठित और लगभग 56 वर्षों से संचालित सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान इन दिनों विवादों के केंद्र में है। विद्यालय प्रबंधन का आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा विद्यालय की साख धूमिल करने, प्रबंधन समिति को प्रभावित करने तथा संस्थान पर नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से षड्यंत्र रचा जा रहा है। मामला अब जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंच चुका है।
1- वर्ष 1970 से स्थापित है विद्यालय
विद्यालय के प्रबंधक वीरेंद्र सिंह पुत्र रामपाल सिंह के अनुसार जनता भारती इंटर कॉलेज भरखा की स्थापना वर्ष 1970 में हुई थी। स्थापना के बाद से विद्यालय क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करता आ रहा है और आज भी क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल है।
2- वर्ष 1980 में मिली स्थायी मान्यता
प्रबंधक द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार वर्ष 1980 में शासन द्वारा विद्यालय को स्थायी मान्यता प्रदान की गई थी। चकबंदी प्रक्रिया के दौरान दिनांक 12 दिसंबर 1980 को चकबंदी अधिकारी द्वारा गाटा संख्या 485, क्षेत्रफल 0.4050 हेक्टेयर भूमि विद्यालय के लिए आरक्षित की गई थी।
3- गाटा संख्या 485 विद्यालय के नाम दर्ज होने का दावा
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों एवं खतौनी में विद्यालय के नाम दर्ज है। विद्यालय की ओर से भूमि स्वामित्व संबंधी प्रमाण पत्र भी प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। प्रबंधन का दावा है कि भूमि पर किसी प्रकार का वास्तविक विवाद नहीं है।
4- वर्ष 1996 में हुआ अनुदानित विद्यालय
प्रबंधक के अनुसार वर्ष 1996 में विद्यालय को शासन द्वारा सहायता प्राप्त (अनुदानित) संस्था का दर्जा प्रदान किया गया। इसके बाद से विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शासन स्तर से लगातार सहयोग मिलता रहा है।
5- विधायक निधि और प्रोजेक्ट अलंकार से मिला विकास
विद्यालय प्रशासन का कहना है कि समय-समय पर भवन निर्माण और संसाधनों के विकास के लिए विधायक निधि से धनराशि उपलब्ध कराई गई। वर्तमान में प्रोजेक्ट अलंकार योजना के अंतर्गत समस्त विधिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद विद्यालय को शासन द्वारा अनुदान आवंटित किया गया है।
6- वसूली न मिलने पर उत्पीड़न के आरोप
विद्यालय प्रबंधन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कुछ लोगों की नजर विद्यालय की व्यवस्थाओं और संसाधनों पर है। आरोप है कि कथित रूप से वसूली की मांग की गई और सहयोग न मिलने पर विद्यालय के विरुद्ध शिकायतों का सिलसिला शुरू कर दिया गया।
7- विद्यालय ध्वस्त करने की धमकी का आरोप
प्रबंधक वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि झूठे एवं निराधार प्रार्थना पत्रों के आधार पर प्रशासन को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि तहसील प्रशासन की ओर से विद्यालय को ध्वस्त करने जैसी बातें कही जा रही हैं, जिससे विद्यालय परिवार में चिंता का माहौल बना हुआ है।
8- 1650 छात्र-छात्राओं के भविष्य पर संकट
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान में विद्यालय में लगभग 1650 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है तो इसका सीधा प्रभाव छात्रों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ेगा।
9- प्रधानाचार्य ने भी जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार
विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रेमपाल सिंह ने 2 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी फर्रुखाबाद को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि विद्यालय की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से लगातार नकारात्मक माहौल बनाया जा रहा है।
10- कथित पत्रकार पर लगाए गंभीर आरोप
प्रधानाचार्य ने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि अमृतपुर क्षेत्र के एक कथित पत्रकार द्वारा लगातार विद्यालय और प्रबंधन के विरुद्ध समाचार प्रकाशित किए जा रहे हैं, जिससे संस्था की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। प्रधानाचार्य ने इसे पीत पत्रकारिता बताते हुए विधिक कार्रवाई की मांग की है।

11- ग्राम प्रधान ने दिया विद्यालय के पक्ष में पत्र
ग्राम सभा भरखा के प्रधान हर्ष प्रताप सिंह ने भी लिखित रूप से तहसील प्रशासन को अवगत कराया है कि गाटा संख्या 485 विद्यालय के स्वामित्व में है तथा ग्राम सभा की ओर से इस भूमि को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने भवन निर्माण को लेकर भी किसी प्रकार की आपत्ति से इनकार किया है।
12- प्रबंधन समिति में हस्तक्षेप की आशंका
सूत्रों के अनुसार पूरा विवाद विद्यालय की प्रबंधन समिति को प्रभावित करने और वर्तमान प्रबंधन को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। विद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ लोग पर्दे के पीछे रहकर अन्य व्यक्तियों के माध्यम से माहौल तैयार कर रहे हैं।
13- विद्यालय की छवि धूमिल करने की साजिश का आरोप
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि वर्षों से संचालित एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान को विवादों में घसीटकर उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों एवं शिक्षकों का मनोबल भी प्रभावित हो रहा है।
14- जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
विद्यालय प्रबंधन ने जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय की गरिमा, विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप आवश्यक है।
अपर जिलाधिकारी ने कहा
अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह से फोन के माध्यम से पूरे मामले और धारा 67 की कार्यवाही पर जानकारी ली गई तो उनके द्वारा बताया गया कि इस संबंध में उन्हें प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ है। मामले की जाँच हेतु सम्बंधित को निर्देशित किया गया है।
15- तहसीलदार का पक्ष स्पष्ट नहीं
इस संबंध में जब तहसीलदार अमृतपुर शशांक सिंह से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। फिलहाल पूरा प्रकरण जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुंच चुका है और अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
लगभग 56 वर्षों से शिक्षा का दीप प्रज्वलित कर रही संस्था को लेकर खड़े हुए विवाद ने अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रबंधन के आरोप सही हैं तो यह केवल एक विद्यालय पर हमला नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था, हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और समाज की शैक्षिक विरासत पर भी आघात माना जाएगा। वहीं यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो उनकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ऐसे में प्रशासन के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा के इस केंद्र को विवादों से बाहर निकालते हुए सत्य को सामने लाने और न्यायसंगत निर्णय सुनिश्चित करने की है।
