कायमगंज/फर्रुखाबाद |
कायमगंज क्षेत्र में अन्ना (आवारा) गोवंश की समस्या लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही है। सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा गोवंश संरक्षण के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। नगर की प्रमुख सड़कों, नवीन मंडी परिसर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक आवारा मवेशियों के जमावड़े ने आम जनता, राहगीरों और किसानों का जीना मुहाल कर दिया है।
सड़कों पर मंडराता हादसों का खतरा
नगर के प्रमुख मार्गों, नवीन मंडी स्थल के आसपास, नई बस्ती रोड तथा कंपिल रोड पर ईदगाह के समीप बड़ी संख्या में आवारा गोवंश झुंड बनाकर घूमते नजर आते हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक मवेशियों के आ जाने से आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। इन हादसों में जहाँ कई वाहन चालक घायल हो चुके हैं, वहीं बेजुबान मवेशी भी तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं।
छह माह पहले सांड के जानलेवा हमले से दहशत
स्थानीय निवासियों में प्रशासन की अनदेखी को लेकर भारी रोष है। करीब छह माह पूर्व नवीन मंडी के पास एक अन्ना सांड ने नगर पालिका के सेवानिवृत्त कर्मचारी चंद्र सिंह जाट पर जानलेवा हमला कर दिया था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इतनी बड़ी घटना के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान न निकाले जाने से स्थानीय लोगों में आक्रोश गहराता जा रहा है।
किसानों पर दोहरी मार, मंडी में भी मवेशियों का कब्जा
- खेतों में फसलों की बर्बादी: ग्रामीण अंचलों में अन्ना गोवंश के झुंड किसानों के खेतों में घुसकर बाजरा, मक्का और अन्य खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं। स्थानीय किसान नीरज, वीरेंद्र और लालू का कहना है कि खेती की लागत पहले ही आसमान छू रही है, ऊपर से गोवंश से फसल बचाने के लिए उन्हें दिन-रात खेतों में जागकर रखवाली करनी पड़ रही है।
- व्यापारी और ग्राहक परेशान: नवीन मंडी परिसर में सुबह होते ही सैकड़ों की संख्या में मवेशी डेरा डाल लेते हैं। व्यापारी संजय गुप्ता, रामू पंडित और पवन ने बताया कि मंडी में मवेशियों के बेरोक-टोक घूमने से किसानों, व्यापारियों और ग्राहकों की आवाजाही में गंभीर रुकावट आ रही है। साथ ही सामान और खड़े वाहनों के क्षतिग्रस्त होने का डर लगातार बना रहता है।
‘कागजी अभियानों’ से कब मिलेगा स्थायी समाधान?
क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर अन्ना गोवंश को पकड़ने के लिए अभियान चलाने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति पुनः बदतर हो जाती है। लोगों की मांग है कि सिर्फ खानापूरी वाले अभियानों की बजाय गोवंश को सुरक्षित आश्रय देने, उनकी निगरानी करने और उन्हें दोबारा सड़कों पर आने से रोकने की एक ठोस व स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
अधिकारी का बयान:
अन्ना गोवंश को पकड़वाने के लिए समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। सड़कों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे मवेशियों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजने के लिए जल्द ही एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। — राजेंद्र प्रसाद, खंड विकास अधिकारी (BDO), कायमगंज
सवाल अब भी बरकरार
प्रशासनिक आश्वासनों और अभियानों के दावों के बीच क्षेत्रवासियों की निगाहें अब अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक कायमगंज की जनता को सिर्फ आश्वासनों के सहारे रहना पड़ेगा और अन्ना गोवंश की इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब देखने को मिलेगा |


