पुलिस की नजर से नहीं बच पाया शातिर दिमाग; मां-बेटा ने मिलकर रची थी ऐसी खौफनाक साजिश, 40 CCTV ने खोली पोल।

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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फर्रुखाबाद/

इटावा-बरेली हाईवे पर रामगंगा पुल के पास तमंचे के बल पर सोने की चेन लूटे जाने की चर्चित घटना आखिरकार पुलिस जांच में पूरी तरह फर्जी निकली। राजेपुर थाना पुलिस और एसओजी की सूझबूझ, तकनीकी जांच तथा लगातार पूछताछ के चलते पूरे मामले का पर्दाफाश हो गया। पुलिस ने झूठी सूचना देकर विभाग को गुमराह करने वाले युवक को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई की है।

कुछ दिन पहले कादरीगेट थाना क्षेत्र के दीनदयाल बाग मसेनी निवासी राहुल शुक्ला ने राजेपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह अपनी मां अनीता शुक्ला के साथ बाइक से जा रहा था। रामगंगा पुल के पास दो बाइक सवार बदमाशों ने उसकी मां के गले से सोने की चेन झपट ली और तमंचा दिखाकर फरार हो गए। हाईवे पर दिनदहाड़े लूट की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजेपुर थाना पुलिस, एसओजी और अन्य टीमों को जांच में लगाया गया। पुलिस ने घटनास्थल से लेकर आसपास के क्षेत्रों तक लगे करीब 40 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। कई घंटे की पड़ताल और तकनीकी विश्लेषण के बावजूद कहीं भी लूट की घटना या संदिग्ध बदमाशों का कोई सुराग नहीं मिला।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को शिकायतकर्ता के बयान संदिग्ध लगे। अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों में विरोधाभास सामने आने पर पुलिस ने गहन पूछताछ की। आखिरकार राहुल शुक्ला सच छिपा नहीं सका और उसने स्वीकार कर लिया कि लूट की पूरी कहानी उसने अपनी मां के साथ मिलकर गढ़ी थी।

पूछताछ में सामने आया कि पारिवारिक परेशानियों और आर्थिक तंगी ने उसे इस कदम के लिए उकसाया। पिता के दुर्घटनाग्रस्त होने, मां की बीमारी के इलाज और अन्य खर्चों के कारण वह कर्ज के बोझ तले दब गया था। पत्नी के अलग रहने और घरेलू तनाव ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी थीं। इसी दबाव में उसने झूठी लूट की कहानी बनाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।

राजेपुर थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह के निर्देशन में उपनिरीक्षक आशुतोष कुमार ने आरोपी को डाबरी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ झूठी सूचना देने और शांति भंग करने संबंधी धाराओं में कार्रवाई करते हुए चालान कर दिया।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस की पेशेवर जांच के सामने झूठ ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता। जिस घटना को लोग हाईवे पर सक्रिय बदमाशों का दुस्साहस समझ रहे थे, वह वास्तव में एक सोची-समझी साजिश निकली।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि झूठी घटनाएं गढ़कर पुलिस का समय और संसाधन बर्बाद करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिले की जनता ने भी राजेपुर पुलिस और एसओजी की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस ने बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाकर कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत किया है। जांच के दौरान दिखाई गई मुस्तैदी और तकनीकी दक्षता पुलिस की कार्यशैली का सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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