फर्रुखाबाद।
गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाने वाली संविदा एएनएम अब अपनी समस्याओं को लेकर मुखर हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर बच्चों के टीकाकरण और परिवार नियोजन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाली संविदा एएनएम ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। जिले के विभिन्न आरोग्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात संविदा एएनएम एकजुट होकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रभारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मानदेय में सुधार, समय से भुगतान, कार्य संबंधी सुविधाएं और लंबे समय से संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग उठाई।
संविदा एएनएम का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनकी ड्यूटी केवल स्वास्थ्य केंद्र तक सीमित नहीं रहती, बल्कि गांवों में जाकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल, बच्चों का नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन कार्यक्रमों का संचालन, लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और शासन की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को सफल बनाने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य भी करने पड़ते हैं।
एएनएम ने बताया कि विभाग की ओर से उन्हें लगातार नई-नई जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं, जिन्हें वे पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ निभा रही हैं। इसके बावजूद मानदेय और आवश्यक सुविधाओं के मामले में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि जब उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफल बनाने की अपेक्षा की जाती है, तो उनके कार्य और जिम्मेदारियों के अनुरूप मानदेय तथा जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
ज्ञापन के माध्यम से संविदा एएनएम ने मांग की कि उनके मानदेय का भुगतान निर्धारित समय पर सुनिश्चित किया जाए, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही उनके कार्यभार और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए उचित मानदेय निर्धारित किया जाए। एएनएम ने अपने दैनिक कार्यों को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई।
लंबे समय से संविदा पर अपनी सेवाएं दे रही एएनएम ने नियमितीकरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देने के बावजूद भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। ऐसे में उनके नियमितीकरण की मांग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें कार्य के दौरान स्थायित्व और सुरक्षा मिल सके।
संविदा एएनएम ने अधिकारियों से अपनी समस्याओं को गंभीरता से सुनने और मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। यदि उन्हें समय से मानदेय, पर्याप्त संसाधन और कार्य के अनुरूप सुविधाएं मिलें, तो वे और बेहतर तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान श्वेता, ज्योति, वैतिका कटियार, विमला देवी, सरस्वती, अंजली, विभा, रेशमा, अंशिका, आमिका, सरिता, वीना, परमिता तिवारी, अर्चना, बाबली, हुमा, साधना समेत जिले की अन्य संविदा एएनएम मौजूद रहीं। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगें अधिकारियों के सामने रखीं और समस्याओं के शीघ्र समाधान की उम्मीद जताई।

