फर्रुखाबाद।
बाढ़ का संकट एक बार फिर ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। मंगलवार सुबह बिलावलपुर पुलिया के पास बाढ़ के पानी और कटान से कमजोर हुई सड़क अचानक धंस गई। इसी दौरान गेहूं से लदी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क में समा गई और पलटते हुए पानी में जा गिरी। हादसे के समय ट्रैक्टर पर सवार चालक और एक अन्य युवक ने किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। दोनों सुरक्षित हैं।

जानकारी के अनुसार शिकारपुर गांव निवासी गोविंद और जोगेंद्र करीब 65 क्विंटल गेहूं की 108 बोरियां ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर फर्रुखाबाद की सातनपुर मंडी में बेचने के लिए जा रहे थे। जैसे ही ट्रैक्टर बिलावलपुर पुलिया के पास पहुंचा, अचानक सड़क का एक हिस्सा भरभराकर नीचे धंस गया। सड़क धंसते ही ट्रैक्टर-ट्रॉली का संतुलन बिगड़ गया और वह बाढ़ के पानी में पलट गई।
अंदर ही अंदर खोखली हो चुकी थी सड़क
ग्रामीणों के मुताबिक लगातार बाढ़ के पानी के बहाव और कटान के कारण सड़क की मिट्टी अंदर ही अंदर बह चुकी थी। ऊपर से सड़क सामान्य दिखाई दे रही थी, लेकिन अंदर से वह पूरी तरह खोखली हो गई थी। भारी वजन लेकर ट्रैक्टर के गुजरते ही सड़क उसका भार सहन नहीं कर सकी और अचानक धंस गई।
हादसा होते ही आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। लोगों ने राहत और बचाव का प्रयास करते हुए पानी में गिरी गेहूं की बोरियों को बाहर निकालना शुरू किया। कुछ बोरियां ग्रामीणों ने निकाल लीं, लेकिन ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत गेहूं की अधिकांश बोरियां अभी भी पानी में डूबी हुई बताई जा रही हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
बाल-बाल बची दो जानें
अचानक सड़क धंसने और ट्रैक्टर-ट्रॉली के पानी में पलटने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि गोविंद और जोगेंद्र समय रहते सुरक्षित बाहर निकल आए। हादसे में दोनों को चोट नहीं आई। ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
बाढ़ से रास्तों की हालत बदहाल
फर्रुखाबाद में पिछले करीब एक महीने से बाढ़ का असर ग्रामीण क्षेत्रों में बना हुआ है। कुछ समय के लिए गंगा का जलस्तर कम होने से लोगों को राहत मिली थी, लेकिन शुक्रवार और शनिवार को हुई बारिश के बाद कई इलाकों में एक बार फिर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है।
बिलावलपुर पुलिया और आसपास के संपर्क मार्गों पर पानी भरने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई स्थानों पर घुटनों तक पानी बह रहा है। ऐसे में सड़क के नीचे कटान होने से हादसे का खतरा और बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जलभराव वाले मार्गों की जांच कराने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने और प्रभावित किसानों को हुए नुकसान का आकलन कराकर राहत दिलाने की मांग की है।

