जिलाधिकारी एम.अरुन्मोली ने किया वीरांगना अवंतीबाई लोधी मेडिकल कॉलेज का आकस्मिक निरीक्षण

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जिलाधिकारी एम.अरुन्मोली ने किया वीरांगना अवंतीबाई लोधी मेडिकल कॉलेज का आकस्मिक निरीक्षण

स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं—मरीजों को शासन की गाइडलाइन के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश

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मरीजों के साथ आत्मीयता, संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण से व्यवहार करें चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ : जिलाधिकारी

जनरल फोर्स ब्यूरो

एटा । जिलाधिकारी एम. अरुन्मोली ने आज जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत जानने के उद्देश्य से वीरांगना अवंतीबाई लोधी मेडिकल कॉलेज का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पंजीयन कक्ष, विभिन्न चिकित्सा वार्डों, पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड सेंटर, सीटी स्कैन, डायलिसिस यूनिट, इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू, पीडियाट्रिक्स वार्ड, मेडिकल कॉलेज की रसोई सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का गहनता से जायजा लिया तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

जिलाधिकारी ने सर्वप्रथम पंजीयन कक्ष पहुंचकर उस दिन पंजीकृत मरीजों की संख्या एवं विवरण की जानकारी ली तथा आभा आधारित डिजिटल ओपीडी पंजीकरण व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने तथा पात्र मरीजों के पंजीकरण का विवरण ऑनलाइन दर्ज किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अल्ट्रासाउंड सेंटर कक्ष का निरीक्षण करते हुए दोपहर तक कार्य किए जाने पर आपत्ति प्रकट करते हुए निर्देश दिए कि जिस प्रकार सीटी स्कैन की सुविधा नियमित रूप से संचालित की जा रही है, उसी प्रकार पैथोलॉजी एवं अल्ट्रासाउंड सेंटर की सेवाएं भी निर्धारित मानकों एवं समय-सारिणी के अनुसार नियमित रूप से संचालित हों तथा जांच रिपोर्ट मरीजों को समय से उपलब्ध कराई जाए।

जिलाधिकारी ने फीमेल सर्जिकल वार्ड, मेल सर्जिकल वार्ड, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड, फीमेल वार्ड, ऑर्थो वार्ड, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड, पीडियाट्रिक्स वार्ड, इमरजेंसी वार्ड एवं आईसीयू सहित विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। उन्होंने भर्ती मरीजों एवं उनके तीमारदारों से सीधे संवाद कर स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जानी। उन्होंने दवाओं की उपलब्धता, समय से भोजन मिलने, चिकित्सकों द्वारा नियमित विजिट किए जाने तथा विभिन्न जांच सुविधाओं के संबंध में मरीजों से जानकारी ली।

सीटी स्कैन सेवा के संबंध में उन्होंने एक मरीज के परिजन से जानकारी प्राप्त की कि जांच के उपरांत किसी प्रकार की धनराशि तो नहीं ली गई। मरीज के परिजन द्वारा धनराशि न लिए जाने की जानकारी दिए जाने पर जिलाधिकारी ने संतोष व्यक्त किया और निर्देश दिए कि मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं में पारदर्शिता एवं शासन के निर्धारित प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को निर्देशित किया कि सभी वार्डों में साफ-सफाई एवं हाइजीन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मेडिकल मानकों में निर्धारित नियमों एवं प्रोटोकॉल के अनुरूप ही कार्य किया जाए। मरीजों को उपचार, जांच, दवा अथवा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से इधर-उधर भटकना न पड़े, इसके लिए संबंधित स्टाफ को आवश्यक प्रशिक्षण एवं स्पष्ट जिम्मेदारी दी जाए।

जिलाधिकारी ने डायलिसिस यूनिट का निरीक्षण करते हुए वहां की व्यवस्थाओं एवं भवन की स्थिति का जायजा लिया। दीवारों में आ रही समस्याओं के संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली तथा निर्देश दिए कि शासन को प्रेषित की गई संबंधित पत्रावली तत्काल उनके समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि डायलिसिस यूनिट को शीघ्र मेडिकल कॉलेज के नए भवन में स्थानांतरित किए जाने कीf कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सके। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस से पत्राचार कर भवन में हो रही हल्की टूट-फूट एवं अन्य तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज की रसोई का भी निरीक्षण किया तथा मरीजों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता एवं व्यवस्था को परखा। उन्होंने निर्देश दिए कि अनुमोदित एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद्य पदार्थों को पूरी सुरक्षा एवं स्वच्छता के साथ तैयार कर मरीजों को उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने भोजन वितरण रजिस्टर का भी अवलोकन करते हुए जानकारी ली कि जितने मरीजों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, उतने मरीज वास्तव में संबंधित वार्डों में भर्ती हैं अथवा नहीं। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, मात्रा एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

इमरजेंसी वार्ड के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को निर्देश दिए कि दुर्घटना एवं अन्य मेडिको-लीगल मामलों में तैयार की जाने वाली मेडिकल रिपोर्ट में मरीज की चोटों का सही, तथ्यात्मक, निष्पक्ष एवं ईमानदारीपूर्वक आकलन किया जाए। रिपोर्ट तैयार करते समय किसी भी प्रकार का पक्षपात न हो तथा निर्धारित चिकित्सा मानकों एवं नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए, जिससे किसी भी व्यक्ति को भेदभाव अथवा अनियमितता की शिकायत का अवसर न मिले।

जिलाधिकारी एम. अरुन्मोली ने कहा कि जनपदवासियों के लिए मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य सीधे व्यक्ति के जीवन से जुड़ा हुआ विषय है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मरीजों को शासन की गाइडलाइन एवं निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है और इसे प्रभावी रूप से धरातल पर लागू करना प्रशासन की भी सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा मरीजों के साथ आत्मीयता, संवेदनशीलता एवं मानवीय भावनाओं को ध्यान में रखते हुए व्यवहार किया जाए। बीमार व्यक्ति और उसके परिजन पहले से ही कठिन परिस्थिति में होते हैं, इसलिए उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण एवं सहयोगात्मक व्यवहार किया जाना आवश्यक है। मरीजों को उपचार के दौरान किसी प्रकार की असुविधा अथवा अनावश्यक परेशानी न हो, यह प्रत्येक संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की जिम्मेदारी है।

निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह, मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा, डॉ. साधना सिंह सहित संबंधित चिकित्सक, अधिकारी एवं कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।

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