फर्रुखाबाद/
ग्राम्य विकास विभाग के निर्देश पर विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 को लेकर जिला स्तरीय पंच सम्मेलन का आयोजन मंगलवार को विकास भवन सभागार में किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं, पंचायतों की जिम्मेदारियों और ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।
जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन दो चरणों में संपन्न हुआ। प्रथम चरण का आयोजन सुबह 10:30 बजे तथा दूसरे चरण का आयोजन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक किया गया। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत के अधिकारी, सभी क्षेत्र पंचायतों के प्रशासक, जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, ग्राम पंचायत प्रशासक, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

प्रशिक्षण के दौरान ग्राम्य विकास विभाग के विशेषज्ञों ने पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों को अधिनियम के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इसमें अधिनियम का विजन एवं उद्देश्य, पंचायत राज संस्थाओं की भूमिकाएं व दायित्व, विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं की तैयारी एवं अनुमोदन, परिवारों का पंजीकरण तथा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इसके अलावा परिसंपत्तियों की योजना, उनका निष्पादन, निगरानी एवं रखरखाव, अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वय तथा पारदर्शिता, सामाजिक जवाबदेही, शिकायत निवारण और सामाजिक ऑडिट जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
गांव की समस्या को योजनाओं में शामिल करने पर जोर
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों से ऐसी कार्ययोजना तैयार करने को कहा, जिसमें गांव की वास्तविक समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से शामिल हो। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनका लाभ ग्रामीणों तक जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
जिलाधिकारी ने चकमार्गों और तालाबों पर राजस्व विभाग के सहयोग से कब्जे हटाकर निर्माण कार्य शुरू कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गांवों में ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं, जो लंबे समय तक उपयोगी रहें और ग्रामीणों को उनका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
अब 100 नहीं, 125 दिन रोजगार देने की तैयारी
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 के तहत श्रमिक परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के स्थान पर 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। श्रमिकों की प्रतिदिन की मजदूरी 300 रुपये निर्धारित की गई है।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत 118 अनुमन्य कार्यों को शामिल किया गया है। इनमें जल सुरक्षा एवं संरक्षण, ग्रामीण अवस्थापना तथा आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि योजनाओं का चयन स्थानीय जरूरतों के आधार पर किया जाए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का भी निर्माण हो सके।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगी खास नजर
जिला विकास अधिकारी ने प्रशिक्षण के दौरान कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर आवश्यक जानकारी दी। उन्होंने योजना के अंतर्गत होने वाले सोशल ऑडिट की प्रक्रिया और उसकी उपयोगिता के बारे में भी विस्तार से बताया।
उपायुक्त (श्रम रोजगार)/परियोजना निदेशक ने प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों को विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 के प्रमुख प्रावधानों एवं महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। सम्मेलन के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को नई व्यवस्था के अनुरूप ग्रामीण विकास कार्यों को गति देने तथा योजनाओं को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी तरीके से लागू करने का संदेश दिया गया।

