फर्रुखाबाद न्यूज़:- गंगा-रामगंगा का जलस्तर घटने से राहत के संकेत, हाईवे खुला तो गांवों में अब भी जिंदगी बेहाल |

By
Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
3 Min Read

फर्रुखाबाद/

Ad image

जिले में लंबे समय से बाढ़ की मार झेल रहे ग्रामीणों के लिए सोमवार को कुछ राहत भरी खबर सामने आई। गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर में कमी आने के बाद बाढ़ के हालात धीरे-धीरे सुधरने लगे हैं। राजेपुर थाना क्षेत्र के चित्रकूट डिप से बाढ़ का पानी उतर जाने के बाद फर्रुखाबाद-बदायूं स्टेट हाईवे पर वाहनों का आवागमन भी बहाल हो गया। हाईवे खुलने से राहगीरों और वाहन चालकों ने राहत की सांस ली।

गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 25 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया। वहीं रामगंगा नदी के जलस्तर में भी करीब 15 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई। बताया गया कि नरौरा बांध से सोमवार को 64,283 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, इसके बावजूद गंगा का जलस्तर 137.50 मीटर से घटकर 136.85 मीटर पर आ गया। जलस्तर में आई इस गिरावट से प्रशासन और ग्रामीणों को आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद जगी है।

डेढ़ महीने से पानी में घिरे गांव, अब भी पूरी राहत नहीं

नदियों का पानी भले ही तेजी से घट रहा हो, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों की मुश्किलें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। कई गांवों में करीब डेढ़ महीने से जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। पानी उतरने के बाद भी अनेक गांवों के मुख्य रास्ते अभी जलमग्न हैं। इससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों के सामने घर और रोजमर्रा की जिंदगी को लेकर संकट बरकरार है।

खेत डूबे तो पशुओं के चारे का संकट गहराया

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर खेती-किसानी पर पड़ा है। खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने के कारण हरा चारा और अन्य फसलें प्रभावित हुई हैं। अब पानी घटने के बाद ग्रामीणों के सामने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था बड़ी चुनौती बन गई है। पशुपालक किसी तरह अपने मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम कर रहे हैं।

नाव बंद हुई तो कई गांवों का संपर्क फिर मुश्किल

जलस्तर कम होने के साथ ही कुछ बाढ़ प्रभावित मार्गों पर नावों का संचालन भी बंद अथवा प्रभावित होने लगा है। ऐसे गांव, जो अभी तक पक्के मार्गों से पूरी तरह नहीं जुड़ सके हैं, वहां आवागमन को लेकर नई परेशानी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी घटने के बावजूद जब तक रास्ते पूरी तरह नहीं खुलते, तब तक राहत अधूरी ही मानी जाएगी।

ग्रामीणों की नजर अब बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि यदि आगे अतिरिक्त पानी नहीं छोड़ा गया तो नदियों का जलस्तर लगातार घटेगा और जल्द ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में चूल्हे फिर से सामान्य रूप से जलेंगे, रास्ते खुलेंगे और जनजीवन पटरी पर लौटेगा।

Subscribe Newsletter

Loading
Share This Article
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *