कायमगंज/फर्रुखाबाद।
पितृपक्ष के पावन अवसर पर पूर्वजों की पुण्य स्मृति एवं पितरों को समर्पित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण में हुआ। कथा व्यास नैमिषारण्य से पधारे श्री शिवानंद भाई श्रीजी महाराज ने प्रथम दिवस श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य का विस्तारपूर्वक वर्णन कराया।

महाराज श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की ओर ले जाने वाला दिव्य मार्ग है। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के अंतःकरण में भगवान के प्रति श्रद्धा और प्रेम का भाव जागृत होता है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण होता है, वह स्थान स्वयं तीर्थ के समान पवित्र हो जाता है।

प्रथम दिवस कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत के प्राकट्य, इसके महत्व तथा कथा श्रवण की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पितृपक्ष में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा को केवल सुनने के बजाय उसके संदेश को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य अनेक प्रकार की चिंताओं और सांसारिक उलझनों से घिरा हुआ है। ऐसे समय में भगवान की कथा मन को शांति प्रदान करती है और जीवन को सही दिशा दिखाती है। भागवत कथा का मूल संदेश प्रेम, भक्ति, सदाचार और भगवान के चरणों में समर्पण है।
कथा के दौरान भजनों एवं भगवान के जयकारों से कथा स्थल भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में होने वाली कथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया।

