बाल श्रम उन्मूलन और श्रमिक कल्याण योजनाओं में तेजी लाएं विभाग: जिलाधिकारी

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बाल श्रम उन्मूलन और श्रमिक कल्याण योजनाओं में तेजी लाएं विभाग: जिलाधिकारी

अलीगढ़ । जिलाधिकारी अविनाश कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय टास्क फोर्स बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन एवं जिला श्रम बंधु की बैठक आयोजित की गई, जिसमें श्रमिक कल्याण, बाल श्रम उन्मूलन तथा विभिन्न श्रम योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में उप श्रम आयुक्त ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना एवं राष्ट्रीय पेंशन योजना के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि विशेष अभियान के अंतर्गत 10,369 श्रमिकों को अंतर्विभागीय समन्वय के माध्यम से योजनाओं से जोड़े जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दौरान योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।

उन्होंने बताया कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित इन योजनाओं का लाभ अधिकाधिक पात्र श्रमिकों तक पहुंचाया जाएगा, जिसके लिए संबंधित विभागों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन विषय पर जानकारी देते हुए उप श्रम आयुक्त ने बाल श्रम, बाल एवं किशोर श्रम के बीच अंतर स्पष्ट किया और बाल श्रम उन्मूलन में आने वाली चुनौतियों और विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा समस्त परगना मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, बेसिक शिक्षा अधिकारी, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड विकास अधिकारी एवं सहायक विकास अधिकारियों को उनकी अधिकारिता की सीमा के भीतर बाल श्रमिकों के चिन्हांकन के लिए निरीक्षक घोषित किया गया है। निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रतिष्ठान अथवा कारखाने में बाल श्रमिक पाए जाने पर निरीक्षक निरीक्षण टिप्पणी जारी कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि खतरनाक प्रक्रियाओं में बाल श्रमिक नियोजन पाए जाने पर सिविल प्रक्रिया के अंतर्गत सेवायोजक के विरुद्ध रुपए 20,000 की आरसी जारी की जाती है। वहीं आपराधिक प्रक्रिया के तहत माननीय न्यायालय सीजीएम के समक्ष अभियोजन दायर किया जाता है, जिसमें रुपये 20,000 से रुपये 50,000 तक जुर्माना अथवा 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा या दोनों का प्रावधान है।

श्रमिक पंजीकरण की जानकारी देते हुए उप श्रम आयुक्त ने बताया कि 40 प्रकार के निर्माण कार्यों से जुड़े 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे श्रमिक, जिन्होंने वर्ष में कम से कम 90 दिन कार्य किया है, वे यूपीबीओसीडब्ल्यू पोर्टल पर पंजीकरण करा सकते हैं। जिले में अब तक 2,37,104 श्रमिकों का पंजीकरण कराया जा चुका है। उन्होंने बताया कि पंजीकृत श्रमिकों के लिए मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना, कन्या विवाह सहायता योजना, निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना, संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना एवं श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय योजना संचालित की जा रही हैं। विगत वर्ष इन योजनाओं के माध्यम से 2,381 श्रमिकों को लाभान्वित किया गया।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि वे बेहतर समन्वय स्थापित कर श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा बाल श्रम उन्मूलन के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

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