योगी आदित्यनाथ एआई वीडियो विवाद में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के खिलाफ एफआईआर की मांग

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योगी आदित्यनाथ एआई वीडियो विवाद में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के खिलाफ

एफआईआर की मांग

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लखनऊ के सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश

यादव द्वारा प्रदर्शित योगी आदित्यनाथ के एआई वीडियो को लेकर एफआईआर की

मांग की

शिकायत में योगी आदित्यनाथ के कथित आपत्तिजनक चित्रण को लेकर धार्मिक

भावनाओं, राजनीतिक अभिव्यक्ति और एआई निर्मित सामग्री की जवाबदेही पर

उठाए गए सवाल

लखनऊ, 2 सितंबर 2026 ………

लखनऊ के सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा ने पुलिस आयुक्त, लखनऊ पुलिस

कमिश्नरेट को शिकायत भेजकर प्रथम सूचना रिपोर्ट, एफआईआर, दर्ज करने और

विस्तृत जांच की मांग की है। यह शिकायत उस एआई निर्मित वीडियो को लेकर

है, जिसे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 31 अगस्त को लखनऊ

में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित

किया था।

शिकायत का केंद्र वह वीडियो है, जिसमें डिजिटल तकनीक से तैयार एक व्यक्ति

को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समान दिखाया गया है और

उसे चिलम पीते हुए प्रदर्शित किया गया है। वीडियो में व्यंग्यात्मक और

कथित रूप से आपत्तिजनक चित्रण तथा गीत भी शामिल हैं। समाचार रिपोर्टों के

अनुसार, अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह वीडियो प्रदर्शित

किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, यादव ने कहा था कि यह वीडियो उन्हें किसी

व्यक्ति द्वारा भेजा या दिया गया था।

संजय शर्मा की शिकायत में जांच एजेंसियों से यह पता लगाने की मांग की गई

है कि वीडियो किसने बनाया, इसे अखिलेश यादव तक किसने पहुंचाया, किस

माध्यम से इसका प्रसारण हुआ तथा इसके सार्वजनिक प्रदर्शन और बाद में

प्रसार की अनुमति किसने दी।

शिकायत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की

मांग है। शर्मा ने पुलिस से वीडियो तैयार करने में इस्तेमाल किए गए

सॉफ्टवेयर या प्लेटफॉर्म की पहचान करने, मूल वीडियो और उससे संबंधित

मेटाडाटा को सुरक्षित रखने, संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और संचार

रिकॉर्ड की जांच करने तथा वीडियो के निर्माता से लेकर उसके सार्वजनिक

प्रदर्शन तक की पूरी डिजिटल कड़ी का पता लगाने का अनुरोध किया है।

संजय शर्मा एक लब्धप्रतिष्ठित कानूनी अधिकार, मानवाधिकार, आरटीआई और

सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में विख्यात हैं। सामाजिक कार्यों से जुड़े

लोगों के बीच उन्हें उनके उपनाम “बंटी” से भी जाना जाता है। वह समाज में

व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता के

रूप में भी जाने जाते हैं।

अपनी शिकायत में शर्मा ने कहा है कि उक्त चित्रण से उनकी धार्मिक भावनाएं

गहराई से आहत हुई हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल राजनीतिक व्यंग्य

तक सीमित नहीं है, क्योंकि योगी आदित्यनाथ का सार्वजनिक रूप से गोरखनाथ

मठ और हिंदू संन्यासी एवं मठ परंपरा से भी संबंध है।

शिकायत में मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 299 का

उल्लेख किया गया है, जो किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और

दुर्भावनापूर्ण तरीके से आहत करने के उद्देश्य से धर्म या धार्मिक

मान्यताओं का अपमान करने से संबंधित है, जिसमें शब्दों, दृश्य

प्रस्तुतियों अथवा इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग भी शामिल है। शर्मा ने

इसके अतिरिक्त बीएनएस की धाराओं 196, 353 और 356 तथा जांच के दौरान लागू

होने वाली अन्य धाराओं के तहत भी जांच की मांग की है। धारा 356 मानहानि

से संबंधित है, जिसमें दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से किए गए कथित आरोप

भी शामिल हैं।

शर्मा ने पुलिस से अखिलेश यादव तथा प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़े अन्य

व्यक्तियों के बयान दर्ज करने, कार्यक्रम की सीसीटीवी फुटेज और

ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने, वीडियो के निर्माताओं और

प्रसारकों की पहचान करने तथा संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित

रखने का अनुरोध किया है, ताकि उन्हें हटाया या बदला न जा सके।

शर्मा के लिए इस पूरे मामले का प्रमुख मुद्दा जवाबदेही है। उनकी शिकायत

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर साक्ष्य आधारित कानूनी जांच की

मांग करती है। इसमें जांचकर्ताओं से केवल यह पता लगाने की मांग नहीं की

गई है कि वीडियो किसने प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी पता लगाने को कहा गया

है कि इसे किसने बनाया, किसने उपलब्ध कराया, किस माध्यम से प्रसारित किया

और इसके सार्वजनिक प्रसार को किसने अधिकृत किया।

अब पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई यह निर्धारित करेगी कि शिकायत

में लगाए गए आरोप औपचारिक आपराधिक जांच के स्तर तक पहुंचते हैं या नहीं।

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